« »

चल पडा है यात्रा पर

1 vote, average: 5.00 out of 51 vote, average: 5.00 out of 51 vote, average: 5.00 out of 51 vote, average: 5.00 out of 51 vote, average: 5.00 out of 5
Loading...
Hindi Poetry

जीवन की यात्रा पर चल पडा है जो तू, ऎ पथिक

चाहे कितनी भी हो लंबी डगर,

चाहे कितने भी चुभे काँटे-कंकड़,

न रूकना थक-हारकर, चलते रहना साहस का तू  बीड़ा उठाकर,

मिलेगी इसी राह पर मंजिल तुझे, ऎ पथिक ।

ज्ञानप्राप्ति की यात्रा पर चल पडा है जो तू, ऎ पथिक

चाहे किसी का व्यवहार कितना भी तुझे अप्रिय लगे’

चाहे किसी का घात कितना भी तेरे मन में आक्रोश भरे,

खोल हृदय के चक्षु, चलते रहना तू  सारे द्वेष मिटाकर,

होगा इसी राह पर प्रज्वलित प्रकाश  उर में तेरे, ऎ पथिक ।

आत्म्खोज की यात्रा पर चल पडा है जो तू, ऎ पथिक

झूठ-फ़रेब, आडंबर कितना ही तुझे बहकाएँ,

सुख-समृद्धि, ऎशो-आराम कितना ही तुझे लुभाएँ,

न भटकना राह से, चलते रहना थामे सत्य का दामन,

होगी इसी राह पर आत्मशुद्धि तेरी, ऎ पथिक ।

आत्मचिंतन की यात्रा पर चल पडा है जो तू, ऎ पथिक

याद कर जाने-अनजाने हुए हैं तुझसे जो दुष्कर्म,

भारी तो नहीं ये उनपर गिनती के हैं जो तेरे सुकर्म,

त्याग भोग, मोह-माया को, चलते रहना परोपकार का तू दीप जलाकर,

मिलेंगे इसी राह पर ईश्वर तुझे, ऎ पथिक ।

7 Comments

  1. ashwini kumar goswami says:

    जीवन यात्रा में आने वाली भांति २ की प्रतिक्रियाओं का सही और सटीक
    उपदेशात्मक दृष्टिकोण दर्शाती हुई इस सुंदर रचना के लिए बहुत बहुत बधाई !

  2. Vishvnand says:

    संगीता जी ,
    बड़ी ही सुन्दर, मनभावन, अर्थपूर्ण, ह्रदय को संतोष और धीरज देती हुई यह एक उत्तम रचना आपने प्रस्तुत की है
    सच ही है “मिलेंगे इसी राह पर ईश्वर तुझे, ऎ पथिक ।”
    इस सुशील रचना के लिए हार्दिक धन्यवाद और बधाई

  3. Parespeare says:

    nice enlightening poem Sangeeta
    beautiful poem
    liked it

  4. Ravi Rajbhar says:

    बहुत अच्छा सन्देश …

  5. dr.paliwal says:

    Bahut hi sundar rachna aur utna hi sundar sandesh…….
    Badhai….

  6. sushil sarna says:

    speechless – Sangeeta true essence of life-very nice-cong.

  7. siddha Nath Singh says:

    आप की रचना पढ़ कर नीरज का गीत याद आ गया-
    चल रे चल मुसाफिर चल जब तक सांस चले!
    कांटे कंकर,पानी पत्थर सब को लगा गले !
    ठोकर तो है दुल्हन पांव की
    पीर तीर है प्रेम गाँव की
    आदि.

Leave a Reply