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आहत

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Hindi Poetry
मन के गहरे सागर में शब्दों का कंकर यों मारा |
बह निकली नयनों के तट से खारे पानी की धारा ||

8 Comments

  1. Vishvnand says:

    क्या बात है,
    बहुत खूब, बहुत सुन्दर
    गहन और मनभावन है,
    इन पंक्तियों का अनुमान
    और उभरती विचारधारा ….

    • dr.o.p.billore says:

      @Vishvnand, आपकी यह सराहना हमारे लिए आशीष है |इसे सदा बनाए रखें | आपका आभार |

  2. sushil sarna says:

    गहरे भाव-सुंदर विचार – पढकर अच्छा लगा

    • dr.o.p.billore says:

      @sushil sarna, मंजे हुए कवियों से प्राप्त सराहना रसायन का काम करती है |आपका आभार |

  3. vpshukla says:

    bahut sundar.

    • dr.o.p.billore says:

      @vpshukla, लम्बी लम्बी गजलों के लेखक से दो पंक्तियों पर सराहना पाकर बहुत अच्छा लगा | आपका धन्यवाद |

  4. parminder says:

    बहुत बहुत सुन्दर! दो-धारी तलवार सी भीतर गयी आपकी दो पंक्तियाँ!

    • dr.o.p.billore says:

      @parminder, परम आदरणीया परमिंदरजी,सादर अभिवादन | दो पंक्तियों पर आप जैसी महान कवियित्री से इतनी सुन्दर प्रतिक्रया पाकर कृतज्ञ हुआ | आपका आभार |

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