« »

पी4पोएट्री का बादल

1 vote, average: 4.00 out of 51 vote, average: 4.00 out of 51 vote, average: 4.00 out of 51 vote, average: 4.00 out of 51 vote, average: 4.00 out of 5
Loading...
Hindi Poetry
पी4पोएट्री का बादल
पी४पोएट्री के मुखप्रष्ट पर बादलों का एक द्रश्य दिखाई दे रहा है| आप भी ध्यान से देखें |
 जिसे देख कर कुछ विचार  मन में उठे जो पर्यावरण दिवस के उपलक्ष पर आपके सम्मुख प्रस्तुत है |
बादल धरती पर लेट कर,
 क्या देख रहा है नील गगन में |
क्या संदेह समाया मन में,
 क्यों आया अवनी आँगन में ||
सोच रहा किसने विदीर्ण की,
 ओजोन ओढनी गगना की |
फिर द्रष्टिपातकर वसुधा पर,
 रोया लख दुर्गति  भूतल की||
रे मानव क्यों निष्ठुर बनकर,
 महि नभ पर इतना तू बरसा |
मै नीर सरोवर से  लाया ,
पर वर्षा करने को तरसा ||  

8 Comments

  1. c.k.goswami says:

    पर्यावरण प्रेमी डाक्टर साहिब -बहुत ही सुन्दर रचना है.सही मायने में कवि ही वो है जो चित्र देखकर उसे जीवित कर दे और घटनास्थल पर ही कलम चला दे.

    • dr.o.p.billore says:

      @c.k.goswami, आपकी सराहना का संबल आत्म बल बढ़ा देता है |
      शब्दों की पतवार कविता की नौका पर लगा देता है ||
      आपका बहुत बहुत धन्यवाद

  2. dr.o.p.billore says:

    आपकी सराहना का संबल आत्म बल बढ़ा देता है |
    शब्दों की पतवार कविता की नौका पर लगा देता है ||
    आपका बहुत बहुत धन्यवाद

  3. U.M.Sahai says:

    पर्यावरण पर एक सुंदर रचना, बिल्लोरे जी.

  4. Raj says:

    Really nice one.

    • dr.o.p.billore says:

      @Raj, कविता को पसंद करने के लिए एवं उत्साह वर्धन केलिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद राज जी \

  5. Vishvnand says:

    बहुत बढ़िया अंदाज़ और सुन्दर मनभावन अर्थपूर्ण रचना,
    इस रचना के लिए हार्दिक बधाई और धन्यवाद भी …

Leave a Reply