« »

आदमी को न दे अहमियत आदमी.

0 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 5
Loading...
Hindi Poetry
बेवफा आदमी बदनियत आदमी
आदमी को न दे अहमियत आदमी.
 
रिज़्क की फ़िक्र और साधना   स्वार्थ की
रत इसी  में  मिला अनवरत    आदमी.
 
ज़िन्दगी को जहन्नुम बनाता रहे
और चाहे है खुश आक़िबत आदमी.
 
खुद  की माने कोई भी वक़अत  आदमी.
दर असल वक़्त के मातहत आदमी.
 
खुद के हाथों हिरासां औ’ हलकान है
कर के बैठा है क्या अपनी गत आदमी.
 

4 Comments

  1. sushil sarna says:

    A nice gajl with deep feelings, liked it Sing saahib

  2. prachi sandeep singla says:

    achchi lagi 🙂

Leave a Reply