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तेरे दर से जो लौट कर आये.

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Hindi Poetry
तेरे दर से जो लौट कर आये.
बेक़रार और बेखबर  आये. 
 
जुस्तजू  का जूनून ऐसा था,
कर के मंजिल भी दरगुज़र आये.
 
राह पर ही बिछी निगाह रही
एक तवक्को थी तू अगर आये.
 
वस्ल तो फिर नसीब हो न सका,
ख्वाब यूँ तेरे रात भर  आये.
 
मेरे दिल की तो देखिये वुसअत,
गम ज़माने के इसमें भर आये.
 
रौशनी तेरी शाहराहों में,
जुल्मतों के कई शहर आये.
 
तेरी यादों की फस्ले गुल आई,
दर्द के फूल फिर निखर आये.
 
ज़िन्दगी चार पल ख़ुशी भर थी,
वो भी हम तेरे नाम कर आये.     

8 Comments

  1. dp says:

    सुन्दर…अति सुन्दर.

  2. Raj says:

    “ज़िन्दगी चार पल ख़ुशी भर थी,
    वो भी हम तेरे नाम कर आये.”
    ,,क्या कहने. वाह.

  3. prachi sandeep singla says:

    achchi hai 🙂

  4. U.M.Sahai says:

    सुंदर, मनभावन.

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