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झर गया जो फूल हिलती शाख से

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Hindi Poetry
झर गया जो फूल हिलती शाख से
रंग मिट्टी में समाया अंततः 
 
हर बुलंदी की यही मंजिल फ़क़त
किस सलीके से बताया अंततः.
 
मुद्दतों रूठे रहे शोखी में तुम,
देख लो पर प्यार आया अंततः.
 
सारी दुनिया घूम के जब आ गए,
सिर्फ अपना देस भाया अंततः.
 
हल अँधेरे का हुआ कब मसअला ,
जब दिया तुमने जलाया   अंततः.
 
रौशनी ने जब किनारा कर लिया,
चल दिया अपना भी साया अंततः.
 
ये जवानी है सभी अपने लगें,
समझोगे अपना पराया अंततः.
 
चंद साँसों का महज था सिलसिला
ज़िन्दगी ने ये बताया अंततः

6 Comments

  1. Vishvnand says:

    बहुत अच्छे
    भायी है रचना ये सुंदर दिल बहुत
    शेर ये सारे शुरू से अंततः
    हार्दिक अभिवादन

  2. kalawati says:

    रौशनी ने जब किनारा कर लिया,
    चल दिया अपना भी साया अंततः.
    कोई शक नहीं सर, बिलकुल सौ फीसदी सच.

  3. rajendra sharma 'vivek' says:

    दुष्यंत जी गजलो से आँखे सजल
    महफ़िल सजाई आपने भी अंतत
    सफल होती जा रही हिंदी गजल
    इसकी सेवा आपने की अंतत

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