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संगीत है … साक्षात्कार …!

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Hindi Poetry

संगीत है … साक्षात्कार  …!

मेरे जीवन की सरगम के
सुर थे चार.
सा रे तो मुख मोड़ चुके थे
ग म ही रहते पास.
ग लागे हैं जब से तेरे,
न्य हो गयी मन की प्यास
नीरसता ने नाता तोडा,
सात सुरों का है अब साथ
स्वर्ग से सुख की ये बरसात……..!


” विश्वनंद “

13 Comments

  1. kalawati says:

    बहुत sundar saat suron ka varnan.

  2. kusumgokarn says:

    Vishvnandji,
    Very well composed with apt words.
    Sincere and heart felt too.
    Kusum

    • Vishvnand says:

      @kusumgokarn
      Thank you very much indeed for the appreciation of the poem. Music & poetry go hand in hand and gift of passion for them does play a divine role in making one’s life very intensely & heavenly enjoyable.

  3. chandan says:

    वाह! बहुत सुन्दर सर गागर में सागर भरना इसे ही कहते होंगे

    • Vishvnand says:

      @chandan
      कमेन्ट की बात बहुत मन भायी,
      गागर बहुत खुशनसीब है गर उसमे संगीत और सागर की ज़रा सी भी बात सामायी ….

  4. M.K.Vishwashali says:

    Short, Sweet and Sampuran

  5. ashwini kumar goswami says:

    सा रे ग म प ध नी सा, सा नी ध प म ग रे सा,,
    मेरे घर में आटा पीसा, चक्की चला रही दादी सा !
    बेटी का है नाम मनीषा, पढ़ती है हनुमान चालीसा,
    दूध है अब मिलता पानी सा, तैल को समझते घी सा !
    सरगम अब ये हुई पुरानी, सीखने में है आनाकानी !

    • Vishvnand says:

      @ashwini kumar goswami
      धन्यवाद

      जिस जीवन की बात विदित की
      सारे गम इन चार सुरों की
      संगीत से जब होता साक्षात्कार
      जीवन हो सात सुरों की बहार

  6. ashwini kumar goswami says:

    सरगम की गरिमा कम ही बची है, डिस्को की ही अब धूम मची है !
    सरगम की कहानी हुई पुरानी, जैसे बूढी हों हमारी दादी-नानी !

    • Vishvnand says:

      @ashwini kumar goswami
      प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद

      संगीत महान है आत्मा सा पवित्र है
      उसकी गरिमा को कभी न आती आंच
      जो आज ज्यादा चल रहा है वह संगीत नहीं
      सिर्फ ध्वनी प्रदूषण का है कलयुगी नाच

      • ashwini kumar goswami says:

        @Vishvnand,
        निर्विवाद निर्विरोध भारतीय संगीत महान है,
        आत्मा सा पवित्र है जिसमें लय अरु तान है !
        सात स्वरों की पृथक-पृथक श्रेणी का स्थान है,
        जिनकी स्वर लहरी रचने का पूर्ण संविधान है,
        वादी-संवादी स्वरों के अनुकूल राग का ज्ञान है !
        सा रे ग म प ध नी की सरगम अब अंतर्धान है,
        आधुनिकता में अब डिस्को का ही बस मान है !
        यद्यपि सरगम बुढा गई जैसे मानो दादी-नानी,
        किन्तु दादी-नानी भी हैं सदा पूज्या जानीमानी !

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