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Diwali aur Dil Ke Diye ……!

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दीवाली और दिल के  दिये ……!

दीवाली के दिन जो दिये जल रहें हैं,
तो दिल के दियों से है क्या इनका नाता,
दीवाली के दीपो मुहूरत जरूरत,
दिल के दियों को मुहूरत न लगता ……!

जगाओ इन्हें प्यार से मेरे प्यारों,
कि चमके ये ऐसे कभी बुझ न पायें,
औरों के दिल के दियों को भी मिलकर
जगाओ की ये सब समा जगमगायें,
फिर देखो इसी ही जमी पर ये जीवन,
हरदिन ही हमसब दीवाली मनाएँ….!

मनाओ दीवाली प्रभू के मनन में,
दिया जन्म जिसने हमें मानव के गण में,
इसी ही खुशी में, स्मरण और शरण में,
करो दीप अर्पित प्रभू के चरण में,
दिलों में जो फिर प्यार के दीप उजलें,
उसीसे चलो सब समा जगमगायें,
फिर देखो इसी ही ज़मी पर ये जीवन,
हरदिन ही हमसब दीवाली मनाएँ….!

दीवाली के दीपो से दिल के दियों को,
जगाओ कि ये सब समा जगमगायें,
ऐसे जगाओ कि हरदम ये चमकें,
दिल के दिये ये कभी बुझ न पायें
फिर देखो इसी ही ज़मी पर ये जीवन,
हर दिन ही हमसब दीवाली मनाएँ……..!.

दीवाली के दिन जो दिये जल रहें हैं,
तो दिल के दियों से है ये इनका नाता.
दीवाली के दीपों मुहूरत जरूरत,
दिल के दियों को मुहूरत ये भाता..…!

दीवाली के दीपों से दिल के दियों का,
ऐसा है नाता,न्यारा सा नाता,
कितना सुगम और प्यारा ये नाता ……!

                          ” विश्व नन्द “

6 Comments

  1. dr.ved vyathit says:

    bhut 2 aap ko hardik shubhkamnayen

  2. rajendra sharma 'vivek' says:

    प्रभु के चरणों में अर्पित इस रचना के लिए बधाई

    • Vishvnand says:

      @rajendra sharma ‘vivek’
      आपकी प्रतिक्रिया और आशय इस मेरे प्रयास का आनंद दूना कर गयी … आपको शुभकामनाओं के साथ हार्दिक धन्यवाद …

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