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गीत और कविता ….!

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Hindi Poetry, Uncategorized

गीत और कविता ….!

कल्पना ही है
जाने कहाँ से आती
शब्दों को लिए

लिख लेता हूँ
गीत बन जाता है
गाने मज़े में

कभी कभी तो
वो गीत ना लगता
कविता लगे

कवि रचता
या कविता रचती
कविगण को

मन की बातें
खुद  बिन जाने ही
कैसे उभरें

लय में होती
छंदों में उभरती
कविता खुद

जब कहता
ये मेरी रची हुई
सच ना लागे

वरदान है
सब काविमनों को
भगवन  का.

ना इतरायें
एक ही नाव में हैं
हम जो  सारे

अपना जुनू
बनाए रखें ताज़ा
प्रार्थना कर

पढ़ते रहें
रचनाएँ औरों की
प्रशंसा कर

चाहा क्या रहा
कुछ यूं  लिख गया
ऐसा ही होता

” विश्वनंद “

9 Comments

  1. kusumgokarn says:

    Vishvnandji,
    Poem sung into a song form is like a strawberry topping on a pudding.
    Kusum

  2. Santosh Bhauwala says:

    आदरणीय विश्वनंद जी ,बहुत प्यारा गीत है और सन्देश परक भी !!!
    साधुवाद !!
    सादर
    संतोष भाऊवाला

    • Vishvnand says:

      @Santosh Bhauwala,
      लिखने बैठा
      मन में उभरा जो
      यूं लिख गया

      पढ़कर ये
      कमेन्ट सुन्दर सा
      धन्य हो गया

      आपका तहे दिल से शुक्रिया

  3. s n singh says:

    sandeshpoorn

  4. rajendra sharma'vivek' says:

    Geet gaayaa thaa shrikrishn ne to ban gai geetaa
    rishiyo rachi thi richaaye to ban gai thi kavita
    hai aapki unmukt abhivykti achchi kavita
    bahati rahe man se nikalkar p4poetry tak saritaa

  5. rajendra sharma'vivek' says:

    Geet gaayaa thaa shrikrishn ne to ban gai geetaa
    rishiyo ne rachi thi richaaye to ban gai thi kavita
    hai aapki unmukt abhivykti achchi kavita
    bahati rahe man se nikalkar p4poetry tak saritaa

    • Vishvnand says:

      @rajendra sharma’vivek’
      सुन्दर अर्थ की पंक्तिया और जो इसमें है सराहना
      आपका बहुत बहुत धन्यवाद, मेरी भी हार्दिक शुभकामना

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