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इक शख्स खो गया है

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Hindi Poetry

कुछ रास्तों की धूल थी

कुछ मंज़िलों के ख़्वाब

निकले जो हम सफ़र पे

तो यही हम-सफ़र मिले

मंज़िल मिलेगी कैसे

रस्ता ही जब ग़लत हो

वो तो तभी मिलेगी

जब सही डगर मिले

इक शख्स खो गया है

दुनियां की भीड़ में

उसका पता चले तो

कुछ अपनी ख़बर मिले

शरमा के इस अदा से

उसने नज़रें यूँ झुका लीं

उसकी नज़र उठे

तो फ़िर से नज़र मिले

 

4 Comments

  1. Vishvnand says:

    वाह
    अंदाज़े बयाँ न्यारा
    मन भाये ये गिले …

  2. siddha nath singh says:

    antim do panktiyon me khvahishon ka jvaar umad raha hai.bahut khoob

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