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ईश्वर को आमंत्रण

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दया निधान दयालू  दया करो भगवन |

कृपा निधान कृपालू कृपा करो भगवन ||

मैया को लेके मेरे घर भी तो आओ भगवन |

चरण की धूल से घर मेरा बना दो पावन ||

चरण की धूल का जो मर्म जाना केवट ने |

धुला के चरण बिठाया था नाव में उसने  ||

बनी पाषाण अहिल्या को जिसने तारा था |

चरण  कि धूल का वो प्यारा सा नजारा था ||

वन  वन ढूंड रहा है गयन्द जिस कण को |    (गयन्द=हाथी

म्रेरे मनमें भि ललक पाने की उस ही धन को ||

अब तो स्वीकार करो मेरा निमंत्रण भगवन |

मैया को लेके मेरे घर भी तो आओ भगवन ||



2 Comments

  1. Vishvnand says:

    भावपूर्ण मधुर और सुन्दर प्रभु की आराधना
    हर सच्चे भाविक की जैसी होती आंतरिक मनोकामना
    रचना के लिए हार्दिक अभिवादन और सराहना

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