« »

एक लड़की मिली थी कल

0 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 5
Loading...
Hindi Poetry

एक लड़की मिली थी कल
आज यद् आ रही पलपल
कल ख्वाबों में थी समाई
आज दिल में मची है हलचल
एक लड़की…

उसकी अल्हर सी अंगराई
बन के नशा मन पे छाई
कुछ ऐसे वो शरमाई
दिल में बजी शहनाई
उसकी ही यादों में हर पल रहा है ढल
एक लड़की…

उसका गोरा बदन जैसा खिला चमन
उसका छुवन जैसे सवन में अगन
मन के पंछी को मिला गगन
दिल के मौसम में आया सावन
उसके आने से गया मन ला मौसम बदल
एक लड़की…

उसकी निगाहों में था प्यार
उसे बातों से मिले करार
उसकी पनाहों में मेले सुकून
उसका ही छाया है मुझपे जूनून
उसके बिना कटता नहीं एक पल
एक लड़की…

{Written during few initial days at the School of Planning and Architecture, New Delhi in year 2008. Inspired and dedicated to a girl (anonymous to avoid trouble/recognition) of my class.}

Shashikant Nishant Sharma

One Comment

  1. Vishvnand says:

    मेरे ख्याल में इस रचना में कई शब्द गलत छपे हैं उन्हें edit कर सुधार दीजिये उसके बाद ही रचना के बारे में कमेन्ट देना उचित होगा

    आज आपने इक दिन में ही इकदम से अपनी सात रचनाएँ पोस्ट की हैं l. ऐसा करना उचित नहीं है l. अपनी दो या तीन ही रचनाएँ एक दिन में पोस्ट करना यहाँ उचित माना जाता है और norm भी है इसका कृपया आगे जरूर ख़याल रखिये . .

Leave a Reply