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तेरी ख़ामोशी..

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Hindi Poetry

तेरी ख़ामोशी…
न जाने कितनी बातें कह जाती है
कुछ अनजानी-सी अदा ये तेरी लगती है
कभी-कभी नज़ारे मिलाना
कभी नजरें मिलकर झुका लेना
कुछ बात कहू तो सुनते रहना
कभी कभी वो तेरा जबाब देना
कुछ बात है जो तू न बताती है
तेरी ख़ामोशी…

कभी कभी दूर रहना
कभी तेरा पास आना
तेरी अजब सी चाहत का अहसास है
न मिलन है, न जुदाई है
ये तेरी हरसत भी खुछ खास है
कभी हंसके मिलती है कभी रूठ जाती है
तेरी ख़ामोशी…

कुछ दुनिया का दर भी है
कुछ मर्यादा का बंधन भी है
सम्बन्ध जो सांसों सांसों की है
ये बंधन तो एहसासों का एहसासों से है
लेओनार्दो डा विन्ची की सच्ची तस्वीर लगती है
तेर ख़ामोशी…

शशिकांत निशांत शर्मा

Shashikant Nishant Sharma

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