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प्रकृति तेरी अजब कृति

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Hindi Poetry

प्रकृति तेरी अजब कृति
नित नए तेरी आकृति
खनिज त्वातों की भंडार
तुझपे निर्भर ये संसार
तुझमे माँ की ममता है
तुझमे अजब क्षमता है
तू है प्रभु की कृति
प्रकृति तेरी…

नदी पहर जंगल
थलचर जलचर खल
साहिल व समंदर
धरती के बहर धरती के अंदर
हर जगह व्याप्त है तू ही तू
दूर रहे कोई किसे तू ही है रु-ब-रु
अद्भुत आनंद की अनुभूति
प्रकृति तेरी…
शशिकांत निशांत शर्मा ‘साहिल’

Shashikant Nishant Sharma

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