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प्रलय

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जैसे शाम का बसेरा हुआ
अचानक गहरे बादल उमड़ पड़े
प्रलय
पानी का और यादों का …..

5 Comments

  1. siddha nath singh says:

    aap kya jaano ki ham kaun sa dukh sahte hain
    sham dhalte hi yahi rog bache rahte hain.

  2. dr.o.p.billore says:

    प्रलय नहीं भूचाल कहो |उमड़ घुमड़ कर जो आया |
    कुछ ही क्षणों के बाद पुनः आशाओं का दीप जलाया
    बधाई|

  3. Vishvnand says:

    बहुत खूब

    चित्र और पंक्तिया जाग्रत करें अनजान भय
    ये प्रलय ऐसा प्रलय जिसमे हो मन तन्मय

  4. yugal gajendra says:

    हाइकू में प्रयास कीजिये,अच्छी विधा है.

  5. U.M.Sahai says:

    एक सुंदर पर निराशा के भाव दर्शाती रचना. यादों व पानी की अधिकता के लिए ‘प्रलय’ शब्द का प्रयोग कुछ जियादा ही कठोर प्रतीत होता है. वैसे भी हर शाम की सुबह होती है व वर्षा तो जीवन प्रदान करती है. सोचियेगा.

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