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मै हुआ फ़ना

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Anthology 2013 Entries, Aug 2012 Contest, Hindi Poetry


मै ….. अदना सा कण
या फिर एक बिंदु
या छोटा सा बीज
मै …. एक शब्द  भर
कर देता नि:शब्द पर
इसके अनेक विकार
स्वार्थ,इर्ष्या,अहंकार
कण से विराट
बिंदु से सिन्धु
बीज से  वृक्ष
तक के  सफ़र में
मै के अनेक रूप
बदलते स्वरुप
इसी मै के कारण
हुए घमासान युद्ध
फ़ना हुआ जब मै
हुए महात्मा बुद्ध

पर कोई अछूता रह न पाये
लक्ष्मीपति हो या लंकापति
इस मै से छुट ना पाये
जीवन भर पछताये

पर जब जब मै हुआ फ़ना
मनुज महात्मा बना
समझो तर गया
बिना मांगे ,मोक्ष पा गया


संतोष भाऊवाला

4 Comments

  1. Vishvnand says:

    अति सुन्दर अर्थपूर्ण और खूबसूरत बयाँ
    Ego को करदो फना लगे सारा जहाँ अपना
    मनभायी ये प्यारी रचना
    commends

    • santosh bhauwala says:

      आदरणीय विश्वनंद जी आपका आशीर्वाद मिला ,कृतार्थ हुई!! अतिशय धन्यवाद !!

  2. rajendra sharma "vivek" says:

    Sundar vichaar door kiye vikaar

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