« »

पैसे पेड़ों पर नहीं लगते – एक स्वप्न

0 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 5
Loading...
Hindi Poetry

कृपया पढ़ने के लिए चित्र पर क्लिक करें।

मेरी सभी रचनाओं का आनंद उठाने के लिए मेरे ब्लॉग का अनुसरण करें – http://kavisushiljoshi.blogspot.com/

5 Comments

  1. Vishvnand says:

    बहुत सुन्दर रचना
    मार्मिक और प्रभावी
    हार्दिक अभिवादन

    भारत को सोने की चिड़िया की उपाधि दी गयी थी
    जब देश में खुशहाली थी, पर्यावरण में हरियाली थी, खेत और खनिज संपत्ति थी
    तब हम कह सकते थे की अपने देश में मीठे फल स्वरूपी पैसे पेड पर लगते हैं
    पर PM ने अब सच कहा डाला है l आजकल ऐसा नही है आज अपने देश में देश और देश की जनता को लूट कर पैसे scams और घोटाले कर भ्रष्ट कारोबार से उगाये जाते हैं और विदेशी बैंक में जमा कराये जाते हैं तो पेड पर कैसे ऊगेंगे ….. 🙂

  2. parminder says:

    बहुत-बहुत अच्छा विवरण है आज के भारत का! हम सब लिख कर अपने मन की भड़ास निकाल भर सकते हैं, जो ज़िम्मेदार हैं इन सबके, कैसे खुलेंगे दरवाज़े उनकी नीयतों के???

  3. dr.o.p.billore says:

    देश की बिलखती आत्मा की अभिव्यक्ति का धधकता हुआ चित्रण |
    कवी धर्म का सफलतम निर्वहन |अनेकानेक बधाई |

  4. Sushil Joshi says:

    आप सभी मित्रों का हार्दिक अभिनंदन मुझे प्रोत्साहित करने के लिए….

Leave a Reply