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लोकतंत्र की कुर्सी

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Hindi Poetry

Loktantra Ki Kursi

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3 Comments

  1. Vishvnand says:

    सुन्दर मार्मिक सटीक रचना
    बहुत मन भायी I हार्दिक बधाई l

    इस ऐसी तैसी व्यवस्था को अब और नहीं सहना हमने
    नाच भ्रष्ट ये इनका रोक अब सबक सिखाना है हमने ….!

  2. Sushil Joshi says:

    हार्दिक धन्यवाद विश्वनंद जी….

  3. Suresh Rai says:

    kya baat sushil ji, paripurna chitran. badhaiyan

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