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जय माँ शारदे

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Hindi Poetry

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4 Comments

  1. Vishvnand says:

    सुन्दर ये भक्ति प्रार्थना आपकी, पढी है मैंने अभी अभी
    भायी बहुत ये मन को मेरे चाहत सुनना podcast भी ….

    रचना के लिए commends

  2. sahil says:

    जय माँ शारदे……….. अति सुन्दर प्रार्थना जोशी जी…..सप्रेम बधाई

  3. dr.o.p.billore says:

    भाई श्री सुशील जोशीजी ,
    उत्तम रचना और बहुजन हिताय कामना | श्रेष्ठ रचना के लिए खूब बधाई |
    किन्तु माँ शारदा के आशीर्वाद से काव्य श्रजन करने वाला धूमिल होना क्यों चाहता है ? यदि उचित समझें तो ध्यान दे |हम चाहते हैं की इतना श्रेष्ठ रचनाकार धूमिल न हो अपितु उज्वल,निर्मल,सूर,तुलसी वाल्मीक हो |

    धूमिल वि० [सं० धूम+इलच्] १. धूएँ के रंग का। लाली लिए काले रंग का। २. जिसमें इतना कम प्रकाश हो कि साफ दिखाई न पड़े। धुँधला। ३. मलिन। गंदा।

  4. Sushil Joshi says:

    आदरणीय विश्वनंद जी, साहिल जी एवं डॉ. बिलोरे जी….. आप सभी का हार्दिक धन्यवाद टिप्पणी के लिए……. डॉ. साहब… धूमिल होने से मेरा तात्पर्य है अपने अंत समय तक लेखनी से जुड़ा रहूँ और इसी कामना को मैंने यहाँ उजागर करने की कोशिश की है……. सादर…

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