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मेरी प्रियतमा -मेरी जीवन संगिनी

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Hindi Poetry

तुम तो ह्रदय का स्पंदन हो, तुम बिन प्राण न रहते तन में |

 तुम बिन जीने कि अभिलाषा,पल भर भी न हमारे मन में ||

तुम  अनुपम उपहार प्रभु के, परम अनुग्रह का फल हो |  

बिना तुम्हारे चल नहीं पाता,जीवन रथ दुश्वर भव रण में ||

जननी जनक बन्धु सब नाते,तुम संग मुझ पर प्यार लुटाते |

मेरी बगिया तुम्ही सजाते,बीहड़ जीवन के कानन में ||

 

7 Comments

  1. Vishvnand says:

    वाह वाह बहुत खूब
    अति सुन्दर भावों की रचना आनंद भर देती मन में
    अपनेआप ही अभिनन्दन के भाव उभरते झट से मन में

    Kudos

  2. dr.o.p.billore says:

    परम आदरणीय विश्वनंदजी | रचना पसंद करने व् सुन्दर प्रतिक्रिया देने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद |

  3. SN says:

    दुश्वर कौन सा शब्द है और इसके क्या अर्थ हैं बताने का कष्ट करें.

  4. dr.o.p.billore says:

    आदरणीय सिद्धनाथ सिंह जी रचना पर गौर करने के लिए आपका आभार ।
    हिंदी तथा उर्दू में प्रचलित शब्द दुश्वार का ही परिवर्तित स्वरुप है दुश्वर ।
    श्री हरदेव बाहरी जी द्वारा लिखित हिंदी शब्द कोष के प्रष्ट कृमांक 401पर दुश्वार शब्द का उल्लेख है जिसका अर्थ है कठिन ।
    महा कवि श्री सोमदेव भट्ट विरचित कथासरित्सागर के मदिरावती नाम त्रयोदशो लम्बक में प्रष्ट कृ . 508 पंक्ति कृ .67 पर दुश्र्वर निम्न प्रकार से वर्णित है :–
    “तत्रोत्तराधिपत्यार्थ मिदानिम दुश्र्वरम तप:”
    इसके अतिरिक्त गूगल पर खोज करने पर अनेक लेखकों तथा कवियों के द्वारा दुश्वर शब्द का प्रयोग किये जाने की जानकारी मिली है ।
    वैसे आपकी आशंका निराधार नहीं है ।क्योकि हिंदी शब्द कोष में दुश्वर शब्द का वर्णन न हो कर दुश्वार शब्द का वर्णन है जिसका अर्थ है कठिन |
    प्रवास पर होने के कारण विलम्ब से उत्तर देरह हूँ ।आशा है क्षमा करेंगे।

  5. Aditya ! says:

    भाषा का ऐसा चाट बन चुका है कि आजकल शुद्ध हिंदी की अच्छी कृतियाँ कम पढने को मिलती हैं. बहुत बढ़िया. लिखते रहिये!

  6. dr.o.p.billore says:

    धन्यवाद आदित्यजी ,आपको रचना पसंद आई और शुद्ध हिंदी में है इसलिए पसंद आई; यह और भी बड़ी बात है | पुनः धन्यवाद |

    • Arvind Rajput says:

      श्रीमान् जी कृपया अपना सम्‍पूर्ण जीवन परिचय प्रदान करने की कृपा करेंगे।
      धन्‍यवाद।

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