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गजल

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अमीर की अट्टालिका में तो नित्य पूनम झांकती है
गरीब की  कुटिया यदा कदा ही चांदनी फांकती है
*
मेहनतकश इंसानों के माथे से पसीना बहता है
कुछ विरलों की किस्मत अमीरी की गाड़ी हांकती है
*
मुनासिब वक्त में दोस्ती का दम सभी भरते हैं
मुफलिसी की घड़ी ही ,सच्ची दोस्ती आंकती है
*
वक्त के मुताबिक़ लोगों के मिजाज बदलते हैं
माता ही आँचल में ममता के सितारे टांकती है
*
मजनूँ की नज़र में लैला बला की हसीना थी
बद्सूरती में भी नजरें ख़ूबसूरती ही आंकती है
*
संतोष भाऊवाला

2 Comments

  1. s n singh says:

    simple but depicting reality.

  2. Vishvnand says:

    Commends
    badii sundar ye rachanaa bahut man bhaayii hai
    Par ise gaane gungunaane laya me thodii refinement jaroori hai….

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