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फिर फागुन आया रे, फिर होली आई रे

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उडी उडी रे गुलाल, उडी उडी रे  अबीर
फिर फागुन आया रे, फिर होली आई रे  
  
कोने कोने फूल खिले हैं 
प्रकृति भी हरियाई रे। … 
नई उमंग ,नई तरंग संग
दिलों में प्रेम गहराया रे। …फिर फागुन ……. 
 
सात रंग की धानी चुनरिया 
पहन गौरी मुस्काई रे। …. 
वृंदावन में नन्द के लाला ने
चांदनी में रास रचाया  रे। …फिर फागुन ……. 
 
छिटक रही नौ रसो की फुहार
हर दिल में खुशियाँ छाई रे 
भूल गए सब शिकवे गिले 
क्या खोया क्या पाया रे.…फिर फागुन ……. 
 
कुछ भीगी तानें होली की
कुछ मीठी कुछ मन न भायी रे  
मीठी तानों को सहेज लिया  
खट्टी को कर पराया रे …… फिर फागुन …
 
संतोष भाऊवाला 

2 Comments

  1. Vishvnand says:

    vaah; bahut badhiyaa
    Ati sundar yah geet tarz me sunane ho lalchaayaa re …! 🙂

    Hearty commends for this beautiful song on Holi ….!Liked very much.

    • santosh bhauwala says:

      aadarniy vishvnand ji apko geet pasand aaya bahut bahut aabhaari hoon, ek nivedan hai agar aap ise apni aawaaj me gakar podcast karenge to mujhe khushi hogi ,

      sadar
      santosh bhauwala

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