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“नारी एक, उसके रूप अनेक”

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Hindi Poetry

नारी तु तो है एक, पर तेरे रूप हैं अनेक,
तेरा तो बस एक ही होना चाहिये परिचय,
कि तेरा अपना नहीं हो बस कोई लक्षय,
तेरे अस्तित्व को तो है, कोख में भी खतरा,
बचेगा नहीं तेरे जिस्म का एक भी कतरा,
जिस दिन से तु धरती पर है उतरी,
तब से ही तुझे कहा गया ऐ पुत्री,
तु तो है एक नारी का बस आगाज्,
कभी ना ऊंची करना अपनी आवाज्,
सबकी बात मानना ही तेरा कर्म है,
बताई राह पर चलना ही तेरा धर्म है,
तु सपने में भी ना जताना अपना अधिकार्,
क्योंकि कोई नहीं सुनेगा यहॉ तेरी पुकार,
ऑखें तु रखना सदा अपनी झुकी,
जो ये ऊपर हुई तु मान खो चुकी,
तु तो हमारे पूरे परिवार का बेटी सम्मान है,
सपने में भी नहीं बताना तेरा जो अरमान है,
तु तो धरती पर आयी है सिर्फ,
हम जो कहे वो करने के लिये,
तेरा कर्म सिर्फ ओरों के लिये जिये,
बचपन में मां-बाप, भाई से डरना,
ससुराल में तु ही सबकी सेवा करना,
घर से बाहर जाना भी है तेरे लिये पाप्,
लक्षमण्-रेखा पार करना भी है अभिशाप,
तु क्या चीज है हमने तो सीता को भी नहीं छोङा,
कोशिश तो यही है तेरा अस्तित्व भी ना रहे थोङा,
कभी ना आगे आने की कोशिश करना,
मिटा ही दी जाओगी जङ से तुम वर्ना,
नारी हो नारी तुम बनकर रहो,
सब अन्यायों को तुम हंसकर सहो,
नारी तु तो है एक, पर तेरे रूप हैं अनेक,

बस, अब बस, बहुत हुआ,
बरसों से सुनती आई हूँ ये ज्ञान,
मुझे आम रहने दो नहीं बनना,
मुझे परिवार का सम्मान,
मुझे मेरे पंख दे दो, दे दो मुझे मेरी उड़ान,
मुझे मेरा स्वतन्त्र आकाश लौटा दो,
मेरा अंधकार लेकर प्रकाश लौटा दो,
मैं नारी हूँ अबला नहीं,
मैं सहनशील हूँ, मजबूर नहीं,
अगर मैं जिद पर आ जाऊँ,
अबला से ज्वाला बन जाऊँ….

………………………………….

“अहिल्या”

9 Comments

  1. kalawati says:

    ये कविता मैंने नारी की आज भी जो स्थिति है, उसे पेश करने की एक कोशिश की है,

  2. VishVnand says:

    बहुत अच्छी कविता है, दिल छूनेवाली
    पर ज़रा बहुत negative और एकतर्फी लगी.
    ये शायद बीते कल की बात ज्यादा है
    नारी का एक सबसे बड़ा रूप है “शक्ति”, सबसे बढ़कर, और आजकल मेरे ख्याल में इसपर ज्यादा लक्ष केंद्रित हो रहा है.

    • renu rakheja says:

      Vishvnandji- for urban cities,you may be right but unfortunately in smaller cities and rural India- this situation still exists which is really the majority in India.

    • kalawati says:

      VishVnand ji,aapka thanx comment ke liye, par shayad aap nahi janate ki aaj bhi beti ko sirf ek bojh hi mana jata hai,use shakti manane walon ki sakhyaa to bahut kam hai,

  3. renu rakheja says:

    kalawati- nicely written poem presented in a grim manner- which is required in such topics

    • kalawati says:

      thanx renu ji, agar me ye kahun ki ek naari ka dard sirf naari hi samajh sakti hai to shayad galat nahi hoga, aaj bhi jab – tab ye topics juban par aa hi jate han.

  4. mona says:

    nice one

  5. singh says:

    sahi farmaayaa aapne maam, तु तो हमारे पूरे परिवार का बेटी सम्मान है,
    सपने में भी नहीं बताना तेरा जो आरमान है, ye hi kaha jata hai har female ko,

  6. simran says:

    sach me sahi kaha .

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