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“जिद करो दुनिया बदलो”

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Crowned Poem, Hindi Poetry

एक जमाना वो भी था जब जिद करने पर बच्चों को मार पडती थी, और एक आज का जमाना है कि माता-पिता बच्चों के जिद ना करने पर नाराज होते हैं, ये ही तो दोड्ती भागती दुनिया का एक रूप है, माता-पिता करें भी तो क्या, चारों और ये ही हो रहा है, कुछ पाना है तो जिद करनी ही होगी.

जिद करो दुनिया बदलो,
कितना प्यारा ये नारा है,
फिर तुम मेरे यारों देखो,
ये संसार बस तुम्हारा है,
जो है दिल में कर गुजरो,
किसी से भी ना तुम डरो,
बस अपने को रखो तुम,
हरकदम पर अपने साथ्,
फिर ना हो चाहे और कोई,
किसी का हाथ तेरे हाथ,
बस बढता चल चला चल,
मंजिल तेरी आयेगी निकल,
एक बस ख्याल तेरे ये रहे,
जिद तेरी ना हो जाये कम,
जिद का देगा जो पूरा साथ,
हार ना होगी कभी तेरे हाथ्,
तभी तो पूरा होगा ये नारा,
जिद करो दुनिया बदलो,
फिर ये संसार तुम्हारा है.

20 Comments

  1. kalawati says:

    आशा है आप सबको मेरा ये कहना कि जिद जरूरी है गलत नहिं लगेगा, अगर किसी को लगे ये गलत है तो बताने का कष्ट् करें.

  2. VishVnand says:

    कलावती जी, ये आपकी बहुत बढिया कविता है और एक अच्छा संगीन satire है, आज के माहौल और वर्तन पर.
    इसके लिए हार्दिक बधाई

    “दुनिया झुकती है, झुकाने वाला चाहिए”, इस कहावत की अतिशयोक्ती और विपर्यास सहन करना पड़ रहा है. क्या करें.

    • kalawati says:

      धन्यवाद सर, आपको मेरे विचार पसन्द आये, क्या करें कई बार जमाने को देखते हुए कुछ बातों को मानना ही होता है.

  3. rajdeep bhattacharya says:

    mat poochiye kitna accha likha hai apne
    behat acchi hai it will create a goosebumps
    really
    nice poem i must say
    regards
    rajdeep
    stars ****

  4. abhi says:

    wah, very nice true poem maam

  5. mona says:

    एक बस ख्याल तेरे ये रहे,
    जिद तेरी ना हो जाये कम,
    जिद का देगा जो पूरा साथ,
    हार ना होगी कभी तेरे हाथ्,
    तभी तो पूरा होगा ये नारा,
    जिद करो दुनिया बदलो,
    फिर ये संसार तुम्हारा है
    very nice.

  6. simran says:

    kalawati ji aapki ye poem very nice hai, ab jid karnaa nice lagegaa.

  7. medhini says:

    A nice poem, well written.

  8. sonal says:

    A nice poem.

  9. singh says:

    very nice, true poem maam.

  10. shushil says:

    जो है दिल में कर गुजरो,
    किसी से भी ना तुम डरो,
    बस अपने को रखो तुम,
    हरकदम पर अपने साथ्,
    bahut achchi kavitaa hai, wahhhh

  11. kalawati says:

    thanx 4 comments.

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