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गीत- अपने ही आंसू…..,

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Crowned Poem, Hindi Poetry

अपने ही आंसुओं के भीगोए हुए हैं,
क्यों इन बरसातों को दोष दें,
अपने ही ग़मों से घायल हैं,
क्यों इन तलवारों को दोष दें,

नहीं,
यह सावन की लगाई आग नहीं है,
हम अपनी ही उम्मीदों के जलाये हुए हैं,
रहीं होगीं आरजुएं कभी यहाँ –
क्यों इन खंडहरों को दोष दें,
अपने ही आंसुओं……,

नहीं,
किसी ने नहीं जगाया है हमें कच्ची नींद से,
कई-कई सपने देखने की थकान है यह,
आयें हैं जागी हुई आंखों में भी सपने कई –
क्यों इन नींदों को दोष दें,
अपने ही आंसुओं……,

नहीं,
किसी समय के छोड़े हुए नहीं हैं हम,
पल-दो-पल हम ही ठहर गये थें इन किनारों पर,
देखा होगा समय ने भी हमें पीछे मुड़कर –
क्यों इन शामों को दोष दें,
अपने ही आंसुओं……,

नहीं,
यह कांटें चुभाये नहीं है डालियों ने,
कही गई ढेरों बातें हैं कांटें बनी हुई,
पत्थरों में पत्थर हुए हैं हम –
क्यों इन फूलों को दोष दें,
अपने ही आंसुओं……,

नहीं,
बहारों की कोई स्मृति नहीं है अब कोई,
हम ही विस्मृत हुए हैं इन फूलों के बीच,
भूले हम ही नहीं हैं वो कथाएँ –
क्यों इन स्मृतियों को दोष दें,

अपने ही आंसुओं के भीगोए हुए हैं,
क्यों इन बरसातों को दोष दें,
अपने ही ग़मों से घायल हैं,
क्यों इन तलवारों को दोष दें.
————-
-नीरज गुरु “बादल”,
भोपाल.

5 Comments

  1. VishVnand says:

    नही,
    समय का दोष नही है,
    ये बहुत सुहावनी कविता,
    कितने समय बाद पोस्ट पर आई है
    समय ने ही तो लाई है,

    नीरज जी, बधाई है,
    कविता बहुत मन भायी है

    • neeraj guru says:

      आदरणीय, यह सच है कि गत माह मैं काफी व्यस्त रहा और कवि धर्म का पालन नहीं कर पाया और साथ ही आप सभी को भी काफी मिस किया.आपके इस स्नेह के लिए मैं आपका आभारी हूँ.

  2. Jyoti Rani says:

    bahut khoob- bahut dino baad nayi kavita padkar achha lagaa.

    • neeraj guru says:

      सच मानो किसी का दोष नहीं है, यह तो मेरा ही प्रारब्ध है.यह मैं ही हूँ अपने ही आंसुओं में भीगा हुआ.तुम्हारी हर टिपण्णी मुझे और ज़्यादा लिखने को प्रेरित करती है.

  3. renu rakheja says:

    kyaa baat hai – bahut khoob-

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