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“तुम्हारे ना होने का अहसास”

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Hindi Poetry

आज जो तुम नही तो कुछ भी क्यों नही है,
ये सावन में भी खुशगवारी क्यों नही है,
ये सावन इतना तप क्यों रहा है,
कहते हँ इस बार ठण्ड बहुत आई है,
मगर मुझे ये दिन झुलसा क्यों रहा है,
अब तो कई दिन सोये हो गए हँ,
आँखों की नींद खो कहाँ गई है,
पहले जब तुम थे तो सपने भी आते थे,
मगर अब ये सपने शब्द ही क्या है,
सारे दिन घर में सब होते है,
मगर मुझे सन्नाटा क्यों लग रहा है,
कहने को अबके बसंत जमकर खिली है,
मगर मेरा दिल मुरझाया सा क्यों है,
आईना देखे दिन बहुत हो गए हँ,
क्योंकि उसमे तो कोई अक्स ही नही है,
कोई नाम मेरा पुकारे तो बोलती नही हूँ,
क्योंकि मुझे अपना नाम ही पता नही है,
अब तो तुम आ भी जाओ पास मेरे,
मुझे लोटा दो ये सारे अहसास मेरे.

“अहिल्या”

3 Comments

  1. shakeel says:

    Kalawati ji bahut khubsurat andaz aur shabd ka prayog kiya hai aap ne

  2. neeraj guru says:

    एक बेहतर कविता.

  3. medhini says:

    aachhi hai kavita.

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