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चाँद फ़िदा फिज़ा पर………….. ?

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Hindi Poetry

लगता है फिज़ा फ़िदा चाँद पर,
ए चाँद तू कहाँ है ?
फिज़ा बस तुझको ही पुकार रही है,
वो बावरी तो अपनी हस्ती मिटा रही है,
क्यूँ तू कहीं छिप गया है,
फिज़ा का सब कुछ लुट गया है,
की थी मौहबत्त तुने तो होश में,
पर तू छुप गया रात के आगोश में,
फिज़ा तो अब पतझङ हो गई है,
वो तो चाँद-चाँद पुकार रही है,
ए चाँद क्यों तू है बादल की ओट में,
वो तड़प रही है मौहबत्त को चोट में,
तू इक बार तो उसकी ख़बर ले,
कि जिंदगी उसकी फ़िर संवर ले,
फिज़ा के पतझङ में बहार तुझसे है,
हर तरफ़ एक ही सवाल तुझसे है,
कि तुझको सच ही ख़बर नही है,
या तू ख़ुद ही जानकर बेखबर है.
जो भी हो बस तू जल्दी से आ,
फिज़ा की जिंदगी में बस बहार ला.

“अहिल्या”

8 Comments

  1. VishVnand says:

    एक अच्छी कविता और सुंदर कल्पना भी.
    लुभावनी

  2. dr.paliwal says:

    Badi achhi kalpana hai,
    taaja halat par tippani achhi lagi…..

  3. medhini says:

    Simply beautiful.

  4. vartika says:

    acchi rachnaa hai…

    s-aabhar

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