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मेरी कविता-मेरी कहानी

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Hindi Poetry

जबसे मैंने है होश संभाला,
तबसे था मेरी आज़ादी पर ताला,
पैदा हुई तो कहाँ थाली की झंकार थी,
ठीकरा फोड़ा गया रोने की किलकार थी,
भाई को मिला प्यार-दुलार अपार,
मुझे मिली तो सही पर दुत्कार,
पर पता नही क्या था मुझमे,
जब भी जंजीरों का अहसास,
कुछ ज्यादा होता था तो,
कुछ ज्यादा होता था महसूस,
कुछ कर गुजरने को हो जाती थी आतुर,
ये ही खूबी कहो या खामी लेकर,
पार करती रही उम्र के पडाव,
और वो दिन भी आया जब सपने होते हँ रंगीन,
आँखों में लिए सपने आई पीया के द्वार,
हाँ-हाँ कहते अच्छे बीते कई बरस,
पर फ़िर वो ही बचपन की खामी,
सीमायें तोड़ जाने की अपनी शक्ति,
बंधे हाथों ने दी उड़ने की स्वीकारोक्ति,
पैरों की इन बेडियों ने दिए गगनचुम्बी,
होंसले, जो रहे सालों दिल में छिपे,
सच पूछो यारों इन ठोकरों ने ही,
जिंदगी गतिशील हसीं की है,
जब भी अपनों ने मुझे,
मेरे अस्तित्व को नकारना,
मिटाना, दबाना चाहा है,
मुझे मेरी अपनी पहचान और भी,
निखर कर, उभर कर मिली है.

“अहिल्या”

30 Comments

  1. VishVnand says:

    क्या कहें, अति सुंदर, मनभावन, उपयुक्त, A1 कविता
    बड़ी ही सुंदर शक्तिशील विचार धारा,
    जो ख़ुद को ही नही, कितनो को दे उत्साह और सहारा,
    अबला बन जाए सबला, बेडिओं का बजाये बाजा ,
    चाहिए ऐसा ही हौसला, जो गलत रूढियों का बनाए तबला ….

    इस कविता और विचारशीलता पर बहुत बहुत बधाई

    • kalawati says:

      VishVnand ji,
      aapke dwaara kahe gaye shabd mere liye bahut mahtva rakhte han, kyonki aap jiski taareef kar de wo pattar to heera hi ban gayaa, bahut shukriyaa aapkaa.

  2. dr.paliwal says:

    कलावतीजी बहुत “पावरफुल” कविता है आपकी
    आजादी पर था जो ताला,
    लगता है अब टूट गया,
    पिन्जरेमें जो बंद था पंछी,
    तोड़ जंजीरे छुट गया.
    बधाई हो……….

  3. VishVnand says:

    Kalavati ji,
    Just wanted to point out that the name of the poem in the title has been repeated. If it is in error, an undesired repetition, then please edit and correct it to read only “मेरी कविता-मेरी कहानी” without repetition.

  4. parminder says:

    दीवारें तोड्कर निकलना हर किसी के बस की बात नहीं है, आप करने का साहस रखती हैं बहुत बडी बात है । बहुत ही अच्छी विचारधारा सुन्दर तरीके से रक्खी है । ईश्वर सब अबलाओं को सबला बनने की हिम्मत दे ।

    • kalawati says:

      parminder ji,
      दीवारें तोड्कर निकलना हर किसी के बस की बात नहीं है, आप करने का साहस रखती हैं बहुत बडी बात है ।
      ye kyaa parminder ji, main saahsi hone ki himmat nahi rakhti balki sthitiyan hi hame ye sab karne ko majboor karti han, balki me to kahungi ki agar har naari chaahe to uski hasti mitaane kaa saahas kaun kar saktaa hai.
      thanx 4 comment.

  5. kalawati says:

    ye kavitaa meri aap biti kahun yaa sab naariyon ki aap biti, sach kahun to har naari ki kahaani ek jaisi hi hai, naari ki peeda ko samjhane ke liye uskaa khud kaa peedit hona maayane nahi rakhtaa, balki me to kahungi ki naari honaa hi ek peeda hai.

    • dr.paliwal says:

      @kalawati,

      माफ़ करना कलावतीजी
      पर मैं इस बात से सहमत नहीं हूँ की नारी होना एक पीडा है,
      बल्कि नारी होना तो गर्व की बात होनी चाहिए,
      कौन देती है……..
      माँ की ममता, बहना का प्यार,
      चिडिया सी बेटी, पत्नी का दुलार,
      नारी ही तो है……….

      • kalawati says:

        @dr.paliwal,
        chaliye maan liyaa ki aap sahi han, par kyaa sab naari ke in rupon ko dil se maante han, kya karen sadiyon se jo chaltaa aa rahaa hai wo to aaj bhi chal rahaa hai.

  6. seema says:

    Very nice poem read as a poem..मुझे मेरी अपनी पहचान और भी,
    निखर कर, उभर कर मिली है.The truth of life… we can always rise above every thing and make our own mark! Good one….

  7. simran says:

    पैदा हुई तो कहा थाली की झंकार थी,
    ठीकरा फोड़ा गया रोने की आवाज थी,
    भाई को मिला प्यार-दुलार अपार,
    मुझे बस मिली भी तो दुत्कार,
    wah, maam sach kitnaa kya kahun, lagtaa hai dil me utar gayaa.

  8. mona says:

    kalawati ji,
    क्या कहें, अति सुंदर, मनभावन, उपयुक्त, A1 कविता
    बड़ी ही सुंदर शक्तिशील विचार धारा,
    जो ख़ुद को ही नही, कितनो को दे उत्साह और सहारा,
    अबला बन जाए सबला, बेडिओं का बजाये बाजा ,
    चाहिए ऐसा ही हौसला, जो गलत रूढियों का बनाए तबला ….

    इस कविता और विचारशीलता पर बहुत बहुत बधाई

    visvanand ji ki in lines ka me bhi iqbaal kartaa hun, salute hai kavitaa ko

  9. abhi says:

    kavitaa bilkul sach lagti hai, aapki himmat ki daad hai, aapne aage aane kaa kadam liya hai,

  10. shushil says:

    kalawati ji,
    पैरों की इन बेडियों ने दिए गगनचुम्बी,
    होंसले, जो रहे सालों दिल में छिपे,
    सच पूछो यारों इन ठोकरों ने ही,
    जिंदगी गतिशील हसीं की है,
    kya khuub likha hai. wah-wah.

  11. singh says:

    kalawati ji,जबसे मैंने है होश संभाला,
    तबसे था मेरी आज़ादी पर ताला,
    पैदा हुई तो कहा थाली की झंकार थी,
    ठीकरा फोड़ा गया रोने की आवाज थी,
    kabile taarif hai poem. kamal hai.

  12. kalawati says:

    aap sabkaa bahut-2 shukriyaa ki aapko meri kahaani pasand aayi, or aati bhi kyun nahi ye to har naari ki aap-beeti jo hai. ek baar aur aap sab kaa dhanyavaad.

  13. kalawati says:

    ye kavitaa maine january contest ke liye submit ki hai.

  14. P4PoetryP4Praveen says:

    Kalawati ji, “Meri kavita, meri kahani” sachmuch sarahniya hai… :o)

  15. Rakesh Verma says:

    Atee Sundar kavita…
    Aap ki abhivyakti kmaal ki hai…
    great punch line; mujhe meri…. ahilya…!
    may god bless you…!

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