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p4- poetry कहूँ,

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Hindi Poetry

p4- poetry साईट का शुक्रिया अदा करने के लिए शब्द नही है, पर फ़िर भी मै ये कोशिश कर रही हूँ

p4- poetry कहूँ,
p4- passion कहूँ,
p4- platform कहूँ,
p4- पंछी की उन्मुक्त उड़ान का आकाश कहूँ,
जहाँ नव-कवि करते है सपने साकार,
कवि हूँ, पंछी हूँ,
आजाद उड़ान का महत्वाकांक्षी हूँ,
चाहता हूँ क्या,
जो देखूं महसूस करूँ,
उसे निर्भय लिख पाऊं,
उस विषय को हर किसी के मन में जगाऊं,
जो दृश्य हिलाता है मुझे,
उसे सबको शब्दों में दिखाऊं,
जो वाकया रुलाता है मुझे,
उसे कविता में प्रस्तुत कर पाऊं,
जो घटना भाती है मुझे,
उसकी खुशबु सब और फैलाऊं,
जो बोलने से डरता है मन,
उसे कलम के संग से बोल पाऊं,
बस p4 ही है ऐसा मंच,
जहाँ असंभव को सम्भव कर पाऊं,
जो समझा करते थे मुझे नासमझ,
उनको अपनी सबसे अलग छवि दिखाऊं,
जो सपने होते थे सिर्फ़ पूरे सपनों में,
उन्हें यथार्थ में जागती आंखों से सच पाऊं.
रेनू जी , विकास जी,
आपका उपकार मै कैसे चुकाऊं,
शुक्रिया उन हजारों कवियों, पाठकों का,
जिनके कमेंट्स पर मै इतराऊं.

“अहिल्या”

10 Comments

  1. viju says:

    P 4 Pranam kahun 2 a nice composition 🙂

  2. sangeeta says:

    A very apt and beautiful description of our favourite site.

  3. VishVnand says:

    P4poetry पर, एक अति सुंदर और उत्तम हिन्दी कविता,
    जितनी p4poetry की अति योग्य प्रशंसा की गयी है, उतनी ही सुंदर इस कविता की छबी है .
    कलावती जी, बहुत बहुत बधाई, और शुक्रिया भी .

    • kalawati says:

      @VishVnand,
      आपका बहुत धन्यवाद जो की आप मेरे विचारो से सहमत हुए

  4. seema says:

    Nice thoughts… good poem..

  5. rajdeep says:

    bahut hi sundar aur manbhavak kavita
    loved it

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