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“हमारे बुजुर्ग, हमारे हमसाये”

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Hindi Poetry

सर पर जो रख दे अपना हाथ,
लगता है हर वक्त हँ हमारे साथ,
बनी रहे उनकी हम पर छत्रछाया,
हर मुश्किल में दिल मांगे उनका साया,
उनके कांपते हाथों में भी है शक्ति भरी,
उनके आशीर्वाद से ही है जिंदगी हरी-भरी,
उनका एक स्पर्श देता है इतनी स्फूर्ति,
जैसे माँ का स्पर्श करता जन्नत की पूर्ति,
जिस घर में है बुजुर्गों का सम्मान,
घर के रथ की है उनके हाथों में कमान,
फ़िर कैसे अधूरे रहेंगे वहां किसी के अरमान,
काश आज के बच्चे खुशी का राज़ समझ पाते,
तो क्यों अंधेरे में अपने वो कदम बढाते,
उनको तो बस नही बस पसंद टोका-टाकी,
चाहे जिंदगी रहे मुठी में बंद पानी जितनी बाकि,
ये युवा पीढी तो माने इसे ही अपनी आज़ादी,
नही जानते बिना बुजुर्गों के साए है उनकी बर्बादी,
पर हमने भी खायी है कसम आखिरी साँस तक,
बुजुर्गों को दिलाएंगे सम्मान हमारे अरमान तक.

‘अहिल्या’

5 Comments

  1. Seema says:

    A very nice poem and a very sensitive topic…

  2. Vishvnand says:

    इस सुंदर कविता के लिए हम बुजुर्गों का आपको प्यार भरा आशीर्वाद.
    कविता में बुजुर्गों के प्रति आदरयुक्त भावनाओं का अति सुंदर विवरण है जिसके लिए हम बहुत आभारी है.
    आशा है कविता पढ़कर कुछ तो नौजवान अंतर्मन को खोजेंगे और सही बात समझेंगे, उन्हें भी एक दिन इस अवस्था से गुजरना है.

  3. subodh garge says:

    this is heart touching and very beautiful poem.
    thanx

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