« »

ओह म्हारा पिया रे पिया रे,…….

0 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 5
Loading...
Hindi Poetry

ये कविता मैंने राजस्थानी भाषा में लिखी है, आशा है
आपको जरुर पसंद आयेगी.

ओह म्हारा पिया रे पिया रे,…….
थारे बिना लागे नहीं माहरो जिया रे,
जहां भी देखूँ तू ही मन्ने, आवे नज़र,
पर तू तो लेता क्यों नहीं मेरी खबर,
तू जो मेरे साथ हो तो बस मन्ने,
धूप भी लागे सबसे सुहाणी पिया रे,
तेरे बिना तो सावन भी मोहे तपे रे,
ओह म्हारा ……………………………………..,
तू तो गयो परदेस छोड़ मन्ने रे,
एक पल भी ना भूली मै तन्ने रे,
सारी सखियाँ करे सिंगार सोलह रे,
पर मेरो तो है पिया ही सिंगार रे,
ना नींद आवै, ना भूख ही लागे रे ,
जिया मेरो एकली ही रहनो चावे रे,
ओह म्हारा ……………………………………..,
तू बस अब तो आजा मेरे साजना,
बस दरस दिखाजा ओ मेरे साजना ,
दिल मेरो तो बस करे अब पिया रे ,
ओह म्हारा ……………………………………..,

“अहिल्या”

6 Comments

  1. Wah ise padhakar to Nusrat ji kauwali yaad aa gai. its veri nice song

    piya re piya re piya re piya re
    thare bina lage naahi mhhara jiya re …………..

  2. Sanjay Bissu says:

    Very nice Kalawati Ji,It’s a great way to touch the heart of Piya who is far away from someone who loves him so much. It’s also touches the key part of the life of many couples.

    • kalawati says:

      आपका शुक्रिया आपने इस गीत की gaharai ko बहुत achchi तरह से samjha है, lagtaa है इस गीत की bhavnaayen आपके दिल के kareeb है.

  3. Vishvnand says:

    बहुत अच्छा गीत .
    मन्ने बहुत पसंद आव्या रे .
    इसे आप गाकर podcast पर जरूर सुनवाइये जी.

    • kalawati says:

      थारो बहुत धन्यवाद सर जी, थाणे मारो गीत पसंद आयो, मै इने गाने की पूरी कोशिश करुँगी .

Leave a Reply