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काश…

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Hindi Poetry

काश, तुम होते मेरे साथ
काश, तुम्हें मैं बता सकती कि
कितनी मनमोहक धूप-छाँव यह मतवाली
वह क्षितिज को छूते बादलों की आँख-मिचौली
वह घिरी हुई मैं सपनों के मध्यस्थ
वह रोमांच ऊंचाई पर पहुँचने का
वह अनुभव असीम स्वतन्त्रता का
उस पुलकित मन में बहते गीत
वह घडी-घडी के बदलते द्वीप
वह चित्र जो आँखों में हैं बन रहे
वह रंग जो मन में स्वतः हैं भर रहे
उन चित्रों का तब चित्रण करती मैं
अगर तुम्हारे साथ होती मैं |

16 Comments

  1. Preeti Datar says:

    Parminder ji, I always enjoy your poems. This theme is also enjoyable, but i think the flow of the poem needs to be worked on. It is not pleasing my ears as I read it aloud, especially the beginning.

  2. अपने अनुभव का काफी अच्छा चित्रण किया है आपने …

  3. Vishvnand says:

    Beautiful thoughts in the poem & the poem too,
    But agree too with Preeti, that it needs slight rework & touching up to improve the flow to come to the high standard of your poems we are always accustomed to.

    • parminder says:

      @Vishvnand, Thanks Vishva ji, these were actual thoughts not pretend 🙂 and I felt like a cheater if I edited, hence…

      • Vishvnand says:

        parminder
        You are very right, I can identify with your feelings, which we always have for some of our poems, which others may not be able perceive

  4. sushil sarna says:

    उस पुलकित मन में बहते गीत
    वह घडी-घडी के बदलते द्वीप
    ati sunder pnktiyan, प्रकृति के साथ भावनाओं का चित्रण मनभावन बन पडा है लेकिन आशाओं की ऊंचाईयौं से थोडा कम-प्रयास सुंदर भावना सुंदर और विषय उससे भी सुंदर-बधाई

  5. rajdeep says:

    short sweet meaningful, flow, poetry everythng is there in it
    loved it ma’am

  6. sakhi says:

    वह चित्र जो आँखों में हैं बन रहे
    वह रंग जो मन में स्वतः हैं भर रहे
    उन चित्रों का तब चित्रण करती मैं
    अगर तुम्हारे साथ होती मैं |

    kya bat hai..bhaut sunder panktiyaa…

    yahi hota hai na khud b khud kai rang bhar jate hai jindagi me jab kiis apne ka sath milta hai..apne is ahsaas ko bakhubi byaan kiya
    regards
    sakhi

    • parminder says:

      @sakhi, सखी, बहुत शुक्रिया, आपके सुन्दर शब्दों का, मेरा मन जानने का | कुछ पल ऐसे होते ही हैं जब अपनों का साथ अनिवार्य लगता है |

  7. vartika says:

    acchi rachna hai di… aur bhavon ko aapne bahut systematically arrage kiyaa hai, which i feel is difficult while writing wen u r overwhelmed with emotions… par aapne yeh bahut acchi tarah se kiyaa… aapki pehli udaan ki khushi aur anubhav ke aks dekh paa rahi hoon main… [:)]

    • parminder says:

      @vartika, वर्तिका, एक तो तुम्हारा दी कहना बहुत भाता है, करीब सी लगती हो 🙂 और पहली उड़ान, इतना प्यारा कारण , सुन्दर नजारे और अकेले? Not fair naa?

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