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कोरा कागज

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Hindi Poetry

कभी बेखुदी में
यूँ ही लिखकर मिटा देना
तेरा नाम कोरे कागज पर
ये मेरी दीवानगी है
मुझे ख़बर है
तू चाँद है मै ज़र्रा हूँ
नही पा सकता तुझको
मगर फिर भी
दिल के किसी कोने में
इक बेबाक सी ख्वाहिश है
के यूँ ही बेखुदी में
कभी तू भी लिखे
मेरा नाम कोरे कागज पर


7 Comments

  1. prasant says:

    dubara mat likhna,,samanjhne me 2 din lage. ..just kidding yaar
    ..nice yaar,,try more..yes,,its touch to my heart..

  2. vartika says:

    bahut sunder…. swagat hai yahan aapka….

    “कभी बेखुदी मै” kripya yahan main ki jagah mein kar lein… kavita bahtu sunder bann padi hai…

  3. sushil sarna says:

    एक सुंदर रचना, भावपूर्ण रचना- लेकिन आप तो उसका नाम लिख कर मिटा देते हैं और उनसे उम्मीद रखते हैं कि वो भी कभी आपका नाम लिखें-किसके लिए- इसी पर मेरी नई पोस्ट पर गौर करें – वैसे प्रयास के लिए बधाई

  4. Vishvnand says:

    अच्छी रचना, बड़ी मनभावन. बधाई

    विचार आया, अगर कोरे कागज़ के बदले साफ़ स्लेट हो तो लिखने और मिटाने ज्यादा सुविधा होगी और title भी “कोरी स्लेट ”

    P4poetry पर आपका हार्दिक स्वागत. Looking forward to more poems from you
    आपका प्रोफाइल भी कोरा है. अपने बारे में जरूर कुछ बताइयेगा.

  5. sakhi says:

    acha likha hai kra kagaz kora na raha

  6. sakhi says:

    achi kavita likhi hai apne

  7. renu rakheja says:

    Welcome to P4poetry ! Nice write

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