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“आज़ादी” contest ke liye

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Hindi Poetry

आज़ादी

देता कितना सुकून शब्द ये न्यारा,
सबको मिलता इससे सुख सारा,
बुजुर्ग, जवान या बच्चा प्यारा,
सब मांगे बस सबसे आज़ादी,
हर किसिकी बस अलग ही आज़ादी,

बच्चा मांगे –
खेलने – खाने की,
तोड़ने – फोड़ने की,
रोने – चिल्लाने की,
पानी में भीगने की,
अपने बाल नोचने की,
सूरज को हाथ से छूने की,
चंदा को मामा बनाने की,

जवान मांगे-
सोने – उठने की,
सपनो में खोने की,
मस्ती में घुमने की,
तन्हाई में रहने की,
गानों पर थिरकने की,
दोस्तों से गुफ्तगू की,
ऊंचाई को छूने की,
जिद पूरी करने की,

बुजुर्ग मांगे –
हर ठोकर पर सम्हालने की,
अपना प्यार लुटाने की,
ढेरों आशीर्वाद देने की,
अपना प्यार लुटाने की,
हर ठोकर पर सम्हालने की,
ढेरों आशीर्वाद देने की,
काँटों को फूल बनाने की,
मुश्किल में साथ निभाने की,
रिवाजों को आगे चलाने की,
रिश्तों को मज़बूत बनाने की,

आज़ादी तो है बस आज़ादी,
दुआ है हमारी तो सब के लिए,
मिले सबको अपने हिस्से की आज़ादी,

“अहिल्या”

7 Comments

  1. c k goswami says:

    बच्चे की आजादी तो सही है ,आजादी की अच्छी मांग है किन्तु बुजुर्ग की आजादी कुछ कम गले उतर रही है ,जिस प्रकार की वो आजादी चाहते हैं उन्हें कौन रोकता है समझ में नहीं आता ,वो तो इस उम्र में इस सबके लिए आजाद हैं..इसके अलावा जवान तन्हाई में रहने की आज़ादी क्यों चाहता हैजबकि एक तरफ तो कवियत्री कहती हैं गाने में थिरकने की और मस्ती में घूमने की आजादी जवान को चाहिए.
    रचना संपादित करके और भी निखर सकती थी.सोच भी कवियत्री की बहुत ही सुन्दर है.बच्चेवाला भाग वाकई अच्छा लगा.

    • kalawati says:

      goswami sir,
      बिलकुल सही कहा आपने कि बुजुर्गों को कौन मना करता है उनकी आज़ादी के लिए, लेकिन सर आजकल का युवा कहाँ छठा है कि उसके फैसलों को, उसकी सोच को, उसकी बनाई मनमर्जी की चारदीवारी को कोई हाथ भी लगाये, फिर भला बुजुर्गों को कहा हक मिलता है आजकल कुछ कहने- सुनाने का.
      और हाँ जवान तन्हाई अपने आप में खोने के लिए ही तो चाहता है. आपके विचारों का शुक्रिया.
      ,

  2. Vishvnand says:

    अच्छी कल्पना आजादी पर कविता के लिए,
    और काफी मनभावन भी निखरी है ….
    और देखा जाय तो बच्चे जवान और बूढे ये आजादी भी काफी हद तक जी भी रहे हैं. और जो खुद को ऐसा आज़ाद नहीं समझते उनके विचारों में बदलाव लाने की जरूरत है.
    पर सबसे बड़ी आजादी है जन्म मरण से मुक्ति की, जिसकी अंदरूनी चाह जीवन भर रहती है नए नए रूप लिए .
    इस रचना के लिए बधाई .

    • kalawati says:

      @Vishvnand ji,
      जन्म मरण से मुक्ति कि आज़ादी तो सच्ची आज़ादी है, में आपके कथन से शत-प्रतिशत सहमत हूँ,
      आपके मेरी रचना को वक़्त दिया , आपका शुक्रिया.

  3. rajdeep says:

    nice i agree wid CKG sir & Vshvnand ji as well
    different interpretations

  4. Preeti says:

    I really liked your poetry, but is a little confused that u are such a good poetress than why wasn’t your poem rhyming

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