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दो धर्मों का प्यार

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Hindi Poetry

दो धर्मों का प्यार

(अगर  सच्चा  प्यार है तो मजहब और धरम कभी भी दीवार नहीं बन सकते )

सब धर्मों में प्यार भरा है , बैर नहीं सिखलाते हैं
मजहब नहीं सिखाते नफरत ,घृणा नहीं फैलाते हैं

फिरोज़ पारसी फॅमिली से , इंदिरा थी इक    पंडितानी
सोनिया क्रिश्चियन इटली की ,राजीव तो थे हिन्दुस्तानी
बैर सिखाता  गर मजहब,परिवार कभी ना  बन पाते
राजीव राहुल  अनमोल  रत्न  हैं ,कहाँ हमें ये मिल पाते

हरवंश राय यूपी  के हिन्दू ,तेजी सिक्ख धरम  वाली
दिया हमें अमिताभ का तोहफा,भर दी बॉलीवुड थाली
सचिन जुड़े अब्दुल्ला से ,  नवाब शर्मीला  बने मिसाल
शाहरुख़ गौरी गीत प्रेम का , इक सुर बना दूसरा  ताल

रहकर संग सलीम के हेलन, प्यार यही समझाता है
प्रेम यहूदी का मुस्लिम से ,धरम नहीं   बंटवाता  है
ऐसे कई  उदाहरण  जिन की सुनते रहते  हम  आवाज
सुनील दत्त -नर्गिस की चर्चा होती  इसीलिए  घर आज

धरम और मजहब के कारण प्यार नहीं घट पाता है
धर्मों  को सम्मान  मिले तो प्यार को और बढाता है

———–सी के गोस्वामी (चन्द्र कान्त) जयपुर

(अगर  सच्चा  प्यार है तो मजहब और धरम कभी भी दीवार नहीं बन सकते )

सब धर्मों में प्यार भरा है , बैर नहीं सिखलाते हैं
मजहब नहीं सिखाते नफरत ,घृणा नहीं फैलाते हैं

फिरोज़ पारसी फॅमिली से , इंदिरा थी इक    पंडितानी
सोनिया क्रिश्चियन इटली की ,राजीव तो थे हिन्दुस्तानी
बैर सिखाता  गर मजहब,परिवार कभी ना  बन पाते
राजीव राहुल  अनमोल  रत्न  हैं ,कहाँ हमें ये मिल पाते

हरवंश राय यूपी  के हिन्दू ,तेजी सिक्ख धरम  वाली
दिया हमें अमिताभ का तोहफा,भर दी बॉलीवुड थाली
सचिन जुड़े अब्दुल्ला से ,  नवाब शर्मीला  बने मिसाल
शाहरुख़ गौरी गीत प्रेम का , इक सुर बना दूसरा  ताल

रहकर संग सलीम के हेलन, प्यार यही समझाता है
प्रेम यहूदी का मुस्लिम से ,धरम नहीं   बंटवाता  है
ऐसे कई  उदाहरण  जिन की सुनते रहते  हम  आवाज
सुनील दत्त -नर्गिस की चर्चा होती  इसीलिए  घर आज

धरम और मजहब के कारण प्यार नहीं घट पाता है
धर्मों  को सम्मान  मिले तो प्यार को और बढाता है

———–सी के गोस्वामी (चन्द्र कान्त) जयपुर

2 Comments

  1. Vishvnand says:

    अच्छी रचना,
    मगर inter religion marriages ही दो धर्मो के प्यार की मिसाल है ये मैं नहीं मानता. ये दो प्रेमियों के प्यार की मिसाल है अगर वो ये शादी का बंधन उम्रभर निभाएं. जब inter religion marriages नहीं होती थीं तब धर्मो में प्यार क्या कम था ? मुझे सब धर्म बहुत प्यारे हैं मगर जहां तक हो सके शादी के मामले में मैं खुद अंतर्धर्मीय विवाह को उतना सफल नहीं मानता. मैंने कई परिवारों में इसका सफल नतीजा नहीं देखा पर नाहक कलह जरूर देखा है. अगर ऐसी शादी दो व्यक्तियों का मिलन है तो ठीक मगर यदि ये दो परिवारों का मिलन है तो बात ज़रा उलझी हुई है..दिखावा एक होता है अन्दर की बात दूसरी ….

    • c k goswami says:

      @Vishvnand, आप अनुभवी और वरिष्ठ नागरिक हैं आपने दुनिया को हमसे ज्यादा देखा है .यहाँ में अपनी अंतिम दो पंक्तियों का ही जिक्र करना चाहूँगा जो साडी कविता का निचोड़ है
      “धरम और मजहब के कारन प्यार नहीं घाट पता है
      धर्मो को सम्मान मिले तो प्यार को और बढ़ता है”
      मेरा कहने का आशय यह है की एक्धाराम दुसरे को सम्मान दे तो प्यार में कमी नहीं आएगी बल्कि प्यार बढेगा.दुसरे धरम को यदि अपने धरम जितनी इज्जत और सम्मान मिलेगा तो हमराही का जीवन सफ़र आसानी से और सुखद कट जायेगा.विधर्मी की ही बात क्यों करें स्वधर्मी विवाह भी तलाक तक पहुंचे हैं और उनका गृहस्थ जीवन चोपट होता अदालतों में देखा है.हर धरम को सम्मान दो मेरा तो यही सन्देश है और विधर्मी विवाह भी सफल हुए है जब जब एक धर्म को दुसरे धरम ने सम्मान दिया है.आपकी प्रतिक्रिया का शुक्रिया.

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