« »

दुनिया ये हमारी है

0 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 5
Loading...
Hindi Poetry

दुनिया ये हमारी है

दुनिया ये हमारी है ,दुनिया ये हमारी
मतलब के हैं रिश्ते-नाते, मौके की है यारी
बनाके बुद्धू काम निकालो ,है ये दुनियादारी

करो ऐक्टिंग कर्जा ले लो ,शाम को भर लो प्याली
लौटाने का नाम ना लेना जेब दिखादो खाली

यारों से गाड़ी मांगो,अर्जेंट काम बतलाओ
सॉरी पेट्रोल ख़तम हुवा कह गाड़ी फिर रख जाओ

धरम का जोर यहाँ कुछ ऐसा,हर कोई पुण्य कमाए
सगी बहन हो कई मगर,इक धरम की  बहन बनाये
धरम बहन का बन भैय्या,यहाँ तनखा खूब लुटाये
सगी बहन राखी पे  मुश्किल से इक्कावन पाए

साले को पाकेट मनी,साली को भेजे साडी
भैय्या  फीस भी मांगे  बोले  मुश्किल खिचती गाड़ी
बेटा रुखी रोटी खिला,  दे माँ बाप को ताना
खुद के सास ससुर को पहुंचे घी से तर यहाँ खाना

देख हाथ में बड़ा सा पेकेट ,मेजबान मुस्काए
खाली हाथ के अभिवादन से उसका मुह मुरझाये
नफे और नुकसान की सोचे दावत  देनेवाले
ठगे   से वो रह जाये देख दस, पहुंचे  खानेवाले

मेहमानों से राम बचाए हर कोई कहता जाये
खुद को मौका लगे तो बन्दा खुद मेहमान बन जाये
चाचा मामा दूरके बनके ,रिश्ते लोग निकाले
ठहरे आके बड़े शहर में भत्ते खूब बचाले

यहाँ शोपकीपर बैठाकर कोल्ड ड्रिंक पिलवाए
दाम बढाकर मॉल बेच दे ,ग्राहक समझ ना पाए

सेल्सगर्ल मुस्कान फेंक कर घटिया माल टिकाये
ग्राहक भी ले क्रेडिट सौदा ,चक्कर खूब कटाए

बूढी लेडी खड़ी सड़क पर ,लिफ्ट की मिन्नत मांगे
अनदेखा सब करें,जवान को लिफ्ट मिले बिन मांगे

छोटी सी गलती पे  बूढा क्लर्क, डांट यहाँ खाए
मेडम करे बड़ी गलती पर ,बॉस फिर भी मुस्काए

दुनिया ये हमारी है ,ये दुनिया है हमारी
मतलब के हैं रिश्ते नाते ,मौके की है यारी
बनाके बुद्धू काम निकालो है ये दुनियादारी

———सी के गोस्वामी (चंद्रकांत) जयपुर

6 Comments

  1. sushil sarna says:

    क्या बात है चन्द्रकांत जी,
    अच्छा किया आपने जो दुनियादारी की तस्वीर दिखलादी
    दुनियादारी के चक्कर में सारी कमाई लुटा दी
    अस्थाई प्रशंसा का ओड़ के मखमल यारो
    कर्ज़ की गठरी बाँध के रातों की नींद लुटा दी

    रचना प्रशंसनीय है बधाई

  2. Vishvnand says:

    बहुत सुन्दर कविता और आज की इस दुनियादारी की जो हर बात और हर चीज़ पर बनियादारी ही है यह उत्तम सा कटाक्ष है .
    इस रचना के लिए हार्दिक बधाई i…

  3. Raj says:

    रचना अच्छी लगी.

Leave a Reply