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ajnabiyat hui tarze-nau

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Hindi Poetry, Uncategorized

khandharon mein na sar fodiye ek naya ghar bana leejiye
sochna ek aazar hai sar pe mat ye bala leejiye
isme surat hai dikhti buri ek naya aaina leejiye
jinn tameere nau ke uthe is shehar ko bacha leejiye
sach kahenge bada shauk tha leejiye fir saza leejiye
sabne hanthon mein patthar liye aap bhi sar utha leejiye
bhula bisra sa naghma hain hum bas labon per saja leejiye

खंडहरों   में  न  सर  फोडिये  एक  नया  घर  बना  लीजिये
सोचना  एक  आजार  है  सर  पे  मत  ये  बला  लीजिये
इसमें  सूरत  है  दिखती  बुरी  एक   नया  आइना  लीजिये 
जिन्न  तामीरे  नौ  के  उठे  इस   शहर   को  बचा  लीजिये
सच  कहेंगे  बड़ा  शौक  था  लीजिये  फिर  सजा  लीजिये
सबने  हांथों  में  पत्थर  लिए  आप  भी  सर  उठा  लीजिये
भुला  बिसरा  सा  नगमा  हैं  हम  बस  लबों  पर  सजा  लीजिये
ये खुलूस अब हुआ बार है इसको सर से उठा लीजिये
अजनबियत हुई तर्जे नौ इसको आदत बना लीजिये

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