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NAYA-YUG NAYI-KRANTI

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Hindi Poetry, Uncategorized

कलम केसरी शंख नाद कर भारत भूमि जगायें .
नया युग और नई क्रांति का आओ बिगुल बजायें

कलम केसरी शंख नाद कर भारत भूमि जगायें .
राष्ट्र धर्मं की बलि वेदी पर चाहे बलि चढ़ जायें
देश धर्म और राष्ट्र भक्ति के भाव लहू मैं भरकर .
नया युग और नई क्रांति का आओ बिगुल बजायें

प्रचंड वेग की निडर लेखनी लिख इतिहास बनायें
हिंसा और आतंकों का आओ दौर मिटायें
मात्रभूमि के गद्दारों को सच दर्पण दिखलाकर
नया युग और नई क्रांति का आओ बिगुल बजायें .

पुष्प की अभिलाषा माखन की सच करके दिखलाएँ
उनकी कर्मठ पत्रकारिता का आदर्श निभायें .
इनके त्याग और बलिदानों के भाव ह्रदय में भरकर नया युग और नई क्रांति का आओ बिगुल बजायें

राष्ट्रवाद की ले मशाल अब घर-घर दीप जलायें .
तम में भटकी राजनीति को ज्योति की राह दिखायें .
दिशाहीन इस राजनीति को अब झक-झोर जगाकर
नया युग और नई क्रांति का आओ बिगुल बजायें

रचना—-
प्रदीप भारद्वाज ‘कवि’
मोदीनगर
०९४५६०३९२८५

3 Comments

  1. Ravi Rajbhar says:

    बहुत ही अच्छी-और सच्ची rachna है देश भक्ति की
    अगर मैं आप को देशकवि कहूँ तो कोई हर्ज नहीं…क्योकि आपकी ज्यादातर लेखनी देश-भक्ति पर ही है…
    इस रचना के लिए बधाई….

  2. medhini says:

    Bhahut achi kavitha,Pardeep.

  3. Vishvnand says:

    बहुत सुन्दर. प्रभावी. देशभक्ति और देशोन्नति की मनभावन कामनाओं से परिपूर्ण.
    रचना के लिए हार्दिक बधाई

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