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अरमानों का बिस्तर

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Hindi Poetry
अरमानों के बिस्तर  को 
रखा था बड़े जतन से सहेज के मैंने
कि बस सुहानी शब आने को है,
फिर वही आशियाँ होगा मेरा,,,
 
बसेंगे खुशबू संग उसके दरख़्त पे,
ओढेंगें उसी की चादर
और सर के नीचे
उसी का तकिया होगा मेरा,,
 
पर वक़्त ने मांगी थोड़ी मोहलत मुझसे
और कहा,
”थोड़े और दिनों तक ज़मीन ही बिछोना होगा तेरा” !
 
मैंने भी सर झुकाया
और
समेट के रख दिया अरमानों भरे बिस्तरबंद को
हालातों के संदूक में,
कहकर कि ”थोड़े दिनों बाद नज़ारा होगा तेरा” !
 
बीतने लगे दिन
और बैठे रहने लगे हम
दरवाज़े पर अपने घरोंदे के,
टकटकी लगाये,
लिए इंतज़ार शब का अपनी जागती आँखों में,
कि कभी तो स्वप्न पूरा होगा मेरा,,
 
फिर एक दिन,
सन्देस भरी फिजा
आकर बैठ गई बगल में चुपचाप,
और
मायूसी से बोली,
”अब शब नहीं आएगी,
हो गयी अनहोनी,
लील गया उसे अँधेरा”
 
सन्देस अभी पूरा सुना भी ना था
कि नज़र गई उसी संदूक पर,
रखा था मैंने जिसमें मेरे अरमानों का सेहरा,,
 
तभी ख्याल आया,”अरे,चाबी कहाँ” ?,,
ढूंढा तो पाया
कि
वक़्त मेरे कान में चुपके से कह रहा था,
”वो चाबी तो बहुत पहले फेंक दी मैंने,
क्योंकि
तेरे अरमानों का बिस्तर तो कबका बेकार हो चुका” !!!!!

9 Comments

  1. vartika says:

    hmm………… ek udaaaas si nazm… udaasi bikher gayi apne peechee…. accha taana baana bunaa hai aapne poora… mujhe khayaalon mein nayaapan dikhaa aur shilp mein orignality (rawness that’s orignal nd lends a personal touch to the poem without snatching away the beauty of it)….so mujhe yeh nazm pasand aayi…

    • prachi says:

      @vartika, thanx vartika…i m really a fan of ur writing skills and hence ur comments means a lot 2 me…but u knw wat honestly,,i was feeling a lack sumwhere in d poem after compiling it but cud nt locate it…but after reading ur comment here,,m feeling better dat u did nt tell any,,तो may b i was thinking wrng…plzzz keep sending ur comments 4 my poems in future 2..those wil really help me…
      regards
      🙂

  2. siddha Nath Singh says:

    meri kavita ki ye panktiyan smaran ho aayeen aap ki rachna padh kar.-
    rahe roz tufan naye naye kabhi hamne dariya-e-vaqt me
    jo vafa ki nav utaari thu vo kabhi ki doob duba gayee.
    bhavon ka samnyeekaran hi rachna ki khubsurti badhata hai, vah is rachna ne puri tanmayata se kiya hai.

  3. Ravi Rajbhar says:

    Bahut sunder prachi jee… 🙂

  4. rajdeep says:

    beautiful

  5. c.k.goswami says:

    “andhere se dar kar arman sote nahin
    ummeed pe jeenewale kabhi yun rote nahi”

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