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कहा पेड़ ने मानव से

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Hindi Poetry

कहा पेड़ ने मानव से
कि हे मानव
तेरे पैदा होने पर
तुझको लकड़ी के पालने पर लिटाया गया
बचपन आते ही तुझको
लकड़ी की एक तिकड़ी देकर
तुझको चलना सिखाया गया
और तेरे पढ़ने-लिखने व  ऐशो-आराम के लिए
लकड़ी की कुर्सी-मेज़ व अन्य फर्नीचर बनवाया गया
हुई जब तेरी शादी तो
तेरी सुहाग-रात के लिए
लकड़ी का डबल-बेड ही सजाया गया
बुढ़ापा आने पर तेरे हाथों में
लकड़ी की एक छड़ी देकर
तुझे सहारा दिलाया गया
और तेरी मृत्यु पर तो हद ही हो गयी
तेरे निर्जीव शरीर को जलाने के लिए
मेरे सजीव शरीर को काट कर
उसे तेरे साथ जलाया गया

इसीलिए तो कहता हूँ कि
तुझे जला कर चल दिए
तेरे सब भाई-बन्ध
तेरे साथ मैं जल गया
ये तेरा-मेरा सम्बन्ध

10 Comments

  1. Vishvnand says:

    बहुत सुन्दर कल्पना और उसमे उभरी रचना,
    मनभावन लगा पढ़ना.
    हार्दिक बधाई की भावना……

  2. Raj says:

    बहुत खूब कहा सहाय जी.

  3. siddhanathsingh says:

    देख तमाशा लकड़ी का वाली क़व्वाली याद आ गयी सर

  4. Aashish ameya says:

    bahut achchi hai.

  5. Shailesh Mohan Sahai says:

    Achchhi Prastuti.
    Vriksha vastava mein Jeevan bhar detey rahtey hain. Hamein hamesha unka kritagya rahna chahiye.
    Anil

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