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एक सूनापन है आँखों में,,

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Hindi Poetry
एक सूनापन है आँखों में,
कुछ खोया सा है बातों में,
धडकनें तो चल रही है,
पर सुकून नहीं है साँसों में..!!
 
ख्वाब देखना तो कबका छोड़ दिया,
सदियों से नींद ही नहीं आँखों में,
बिखर गया,टूट गया,मेरी हर ख्वाइश का घरौंदा,
किस्मत की लकीर जो नहीं हाथों में..!!
 
राहें कुछ इस तरह मुड़ी  मेरी ज़िन्दगी की,
कि खो गयी मंजिल भी उन्ही राहों में,
आज तक समझ ना पाया इस ज़िन्दगी को कोई भी,
जाने क्या क्या छुपा है हर एक ज़िन्दगी के  बागानों में..!!!!
 
 
 
 

6 Comments

  1. Vishvnand says:

    बहुत सुन्दर कविता, विचारों के झमेले में ,
    दिल खुश हुआ पढ़कर इन पंक्तियों में खोने में.
    हार्दिक बधाई, लिखते रहिये …

  2. Raj says:

    बहुत गहरी बात कह दी प्राची जी.

  3. vmjain says:

    गहन विचार. सुंदर रचना. बधाई.

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