« »

लहरे याद.

0 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 5
Loading...
Uncategorized

दिया एक याद है
रोशनी की लहर में
तुम्हे देखे बिना
चुकेगा नहीं मन
निशीथ की हवा में भी
तुम्हारी यादों की रोशनी
फैलती जायेगी
उसी रोशनी की रेखा को
तुम्हारी यादों को
मन अपने पुष्टों में
प्राण प्रमाण छुपा लेगा
फिर भी दोस्त
तुम तरुण प्रभात हो ना
तुम्हारी किरने नित्य
मेरे मनोविस्व में
उभरती ही रहेंगी ..!

3 Comments

  1. dr.paliwal says:

    Vah….! Sundar rachna hai….

  2. Raj says:

    Liked it.

  3. Vishvnand says:

    बहुत सुन्दर कल्पना और हिंदी में रचना लिखने का प्रशंसनीय और कौतुकास्पद प्रयास.
    कुछ शब्दों में त्रुटियाँ होते हुए भी रचना बहुत मनभायी .
    हार्दिक बधाई … आपसे और रचनाओं की उम्मीद.

Leave a Reply