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अब गाँव लौटने का मन करता है!

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Crowned Poem, Hindi Poetry

वो सुबह देखने का मन करता है,
वो शाम देखने का मन करता है,
वो खेत और खलीहान देखने का मन करता है,
बस हमेशा के लिए अब गाँव लौटने का मन करता है!

यहाँ न दिन है न रात है,
हर मोड़ पर लोगो की जमात है,
सब पता नही कहाँ भागे जा रहे हैं,
ऐसा लगता है की जिंदगी से ही आगे जा रहे हैं,
बस हमेशा के लिए अब उस जिंदगी के साथ लौटने का मन करता है!

साथ मे काम करने वाले भी एक दूसरे को नही जानते,
कभी साथ रहने वाले भी किसी को नही पहचानते,
सागर की लहरों की तरह बहते जा रहे हैं,
चंद कागज के टुकड़ो के लिए लोग अपनो को भूले जा रहे हैं,
बस हमेशा के लिए अब अपनो के साथ साथ लौटने का मन करता है!

अब एक पल भी यहां रहा नही जाता,
उन हवओ से अलगाव अब सहा नही जाता,
उन पंछीयों की पुकार को अब सुनने का मन करता है,
बिन बादल बरसात मे अब भीगने का मन करता है,
बस हमेशा के लिए उस जगह लौटने का मन करता है!

वो जाड़े की दिन याद आते हैं,
और उनमे सुलगती हुई आग याद आती है,
वो गर्मी के दिन याद आते हैं,
और वो लू की प्यास याद आती है,
वो धूप याद आते हैं,
और उस धूप मे पीपल की छांव याद आती है!
वो आँगन मे खाट पर सोना याद आता है,
और उसकी चाँदनी रात याद आती है!
वो बरसात याद आता है,
और उसमे भीगे हुए दोस्त का साथ याद आता है!
वो गाँव की हर बात याद आती है,
बस अब हमेशा और हमेशा के लिए गाँव लौटने का मन करता है!

….Nirmal

4 Comments

  1. Vishvnand says:

    बहुत प्यारे मनभावन ख्यालों और भावनाओं की रचना है,
    गाँव की यादों में खोने, इसे बार बार पढ़ने का मन करता है.
    बधाई

  2. rachana says:

    bahut sundar kavita…

  3. siddha Nath Singh says:

    वाह, क्या भावुक और संवेदना संपृक्त पंक्तियाँ रच दीं आपने. निदा फाजली की लाइनें याद आ गयीं
    घर जाने में देर न करना वर्ना घर खो जायेंगे.

  4. vmjain says:

    गावं की याद आने पर मन के दर्द का मार्मिक चित्रण. अच्छी प्रस्तुति.

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