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माँ

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माँ ,
तुम क्या हो ?
मेरे बचपन ,मेरे योवन की
संगिनी ,या
और भी कुछ ?
मेरे दर्द , मेरे दुखों की
दवा , या
और भी कुछ ?
मेरी आशा ,मेरी खुशियों की
लहर ,या
और भी कुछ ?
मेरे जीवन ,मेरे सफ़र का
पड़ाव ,या
और भी कुछ ?
मेरी सांस ,मेरी आस का
पथ या
और भी कुछ ?
मेरी पलकों ,मेरे सपनो का
स्रोत ,या
और भी कुछ ?
क्या -क्या हो माँ तुम ?
शायद मेरी sab कुछ
haan sab कुछ
haan , haan माँ , sab कुछ

8 Comments

  1. Vishvnand says:

    बहुत सुन्दर,
    और बहुत ही खूब कहने का अंदाज़.
    कविता बहुत प्यारी और मनभावन उभरी है,
    रचना के लिए हार्दिक बधाई …
    हाँ, माँ तो होती ही है कितना कुछ, सब कुछ और फिर भी और भी कुछ …कभी ख़त्म न होने वाला इतना सारा कुछ.

  2. rachana says:

    bahut achcha vivran…maa sach much sabse oochi hoti hai….dhanyavaad..

    Rachana

    • malika sahai says:

      @rachana,
      आसमान की तरह माँ के प्यार का न कोई ओर होता है न कोई छोर
      धन्यवाद ,रचना

  3. Shailesh Mohan Sahai says:

    गज़ब की अभिव्यक्ति है आपकी मालिका जी, . माँ से अच्छी, माँ से अधिक सम्पूर्ण इस धरा पर शायद कुछ भी नहीं है. बहुत-बहुत बधाई हो
    शैलेश

    • malika sahai says:

      @Shailesh Mohan Sahai,
      एक चिड़िया घोसले में आई ,
      बच्चो ने पूछा ,माँ आसमान कितना बड़ा है ?
      चिड़िया ने पंख से बच्चों को ढक लिया ,कहा
      सो जाओ मेरे पंख से छोटा है

  4. vpshukla says:

    bahut sunder.bhav aur shabd piroe hue hain.

    • malika sahai says:

      @vpshukla,
      बच्चो को माँ नौ महीने तक गर्भ में रखती है ,
      अपनी बाँहों में तीन साल तक और अपने हृदय में तब तक,
      जब तक कि खुद उसकी मृत्यु न हो जाय
      धन्यवाद

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