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बस ,यादें

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Anthology 2013 Entries, Crowned Poem, Hindi Poetry

तुम्ही ने तो कहा था – इतनी सुन्दर मुस्कराहट …तुम्हारे होठों को पी जाने का मन करता है
हमेशा मुस्कुराती रहना .
हाँ – आज भी मैं मुस्कुरा रही हूँ -बस तकिया ही तो भीगा है
मुस्कराहट बरकरार है
और यह दिल अकेला नहीं है
तुम्हारी यादें है ना दिल के पास
रोज़ उन्हें सहलाती हूँ
चूमती हूँ
घमंड करती हूँ
इन्हें कोई छीन जो नहीं सकता मुझसे.

याद है जब तुमने मुझे पहली बार छुआ था
मेरी कम्पन रुकती ही  नहीं थी
जैसे भूकंप आ गया था
तुम कितना हँसे थे
और जब हम बेर के पेड़ के नीचे बैठे थे
तुम्हारी गोद में लेटी.मेरा जहां मुकम्मल …..
वह छोटू ने कैसे बेरों की बारिश की थी हमारे ऊपर
और उस दिन जब घर की बत्ती चली गयी थी
मोमबत्ती भी खत्म हुई पर तुम्हारी बाहों की गिरफ्त नहीं
और तुमने कहा – अँधेरे की रोशनी में तुम और खुबसूरत लगती हो

क्या तुम उसे भी ले जाते होगे वहां-हमारे बेर के पेड़ के नीचे  ?
क्या उसे भी कम्पन होती है तुम्हारे छूने पर ?
क्या वोह भी अँधेरे की रोशनी में……?

कई बरस हुए,मेरी ज़िंदगी की मोमबत्ती बुझ चुकी
बस इंतज़ार है कि अन्धेरा मुझे पी जाए

41 Comments

  1. एक अतीत के आईने की तरह प्रतीत होती बहुत ही सुंदर रचना.रेनू जी.

  2. Vikash says:

    अगर आप हिंदी में ऐसा लिख सकती हैं, तो लिखती क्यूँ नहीं? दिल को छूती हुई निकल गयी कविता. तीर की मानिंद तेज, पिघला देने वाली.

  3. medhini says:

    A lovely poem, Renu.Pasand ho gayi.

  4. parminder says:

    अतीत की दर्द भरी यादें हर शब्द में लिप्त हैं\ बहुत सुन्दर रचना है यह रेनू| और वाकई distinction की deserving है|

  5. neha says:

    bahut badiya renu ji, har shabd itna gehra hai k me khud usme doob gayi, very nice .

  6. prachi says:

    veryyyyyyyyyyyyyyyyy beautiful nd deeply touching one…plzz do write some more in hindi too,u r as good in it as ur in english ones..keep it going,,loved it 🙂

    • renu rakheja says:

      @prachi, हमेशा से सोचती थी की हिंदी में पड़ने में जो आनंद आता है- वो अंग्रेजी में नहीं …और अब लिखना शुरू किया है तो ज़रूर और लिखूगी.उत्साहित करने के लिए धन्यवाद

  7. Vishvnand says:

    Well, this indeed is a very “Bold & Beautiful” of a poem sustained with very delicate, enticing & finely knit feelings.
    Liked immensely
    An outstanding artistic poem from you and that too in Hindi, ……Kudos is the word for the poem and for your artistry in Hindi too.. Heartily wish you keep it up.

    This is not just an attempt, this is very near mastery.

  8. ~HIRAL~ says:

    amazing poem renuji……. mujhe meri prem kahani yaad aa gai……. this poem is resembling so mch wid my life….. wonderful… likd it immensely…. 🙂

  9. sushil sarna says:

    रेनु जी शब्दों को आवाज कैसे दूं, किस तरह शब्दों में लिपटी पीड़ा की तारीफ़ करूं, हिर्दय में छुपी यादों की तरंगों से आपने जो अतीत की तस्वीर को जीवित किया है कैसे उसकी तारीफ़ करूं- बस दो शब्द ही कहूँगा – बेमिसाल रचना

  10. vpshukla says:

    shabda piroye se hain.bhavanao ki sundar dagar.bahut badhiya.

  11. vmjain says:

    अँधेरे की रौशनी में खूबसूरत लगना- वाह! यादों का जाल कैसे घेर लेते है -आप से जानने को मिला.

  12. purabi says:

    Hail thee!!!u pushed me so far to idolize you…
    this certainly is a landmark modern Hindi poetry that fortunately breaks the classical rule that the vernacular writings still cling onto. the intense emotion, the coyness of the speaker, the pride all amalgamate so well, it just leaves a strong imprint.

  13. Preeti Datar says:

    podcast! or recite it live 😛
    this one’s amazing!

  14. viju says:

    absolutely beautiful expression of feelings

  15. viju says:

    very beautifully expressed Renu

  16. rachana says:

    liked it….

  17. rajdeep says:

    yes it is really nice poem to read

  18. vartika says:

    kyaa kahooon…. kuch kehne ke liye hai hi nahin………….. bas mann pee gaayaa is rachnaa ko….

  19. Aditya ! says:

    बहुत ही सुन्दर रचना… संवेदनशील.. कितने प्यार से भीतर का दर्द कविता के रूप में बह गया … आशा है कि मन से भी बह जाए..

  20. Kailash Chand Maurya says:

    रेनू जी बहुत ही सुंदर कविता हे दिल को छु गई, कुछ तो बात हे आप की कविता में जो मुझे बार-बार पढ़ने को बचे कर देती हे, लिखे रहे कीप्ट अप
    कैलाश मोर्य

  21. Ravi Rajbhar says:

    वाह….शब्द ही नहीं मेरे पास रेनू जी,
    मैं किन शब्दों से इस रचना के प्रति अपनी भावनाए ब्यक्त करूँ…वैसा शब्द ही मेरी पोटली में नहीं है!
    बस जी चाह रहा है होंठो को बंद कर आँखों से इस कविता को दिल में उतारता जाऊ..और हाँ अबतक aapki जीतनी भी पोएम मैंने पढ़ी थी सभी engilish में हैं ..aaj aapki itani शक्त हिंदी पढ़ कर..आपकी प्रतिभा को नमन है…
    बधाई हो …. 🙂

  22. P4PoetryP4Praveen says:

    नो कमेंट्स…

    (5 *****) भेंट… 🙂

  23. thepoet.20xx says:

    I admire the way you have written the Words..the Way the emotions moulded into the words ..This one is OSUM ..

    Here is my words for this poem:-

    “Kuch iss Tarah likha hai
    K ek bar aur
    padne ko jee chahta hai..
    khud se 1 bar aur
    ladne ko jee chahta hai …”

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