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वक़्त और जिंदगी

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Hindi Poetry

जिंदगी, जिंदगी भर उस दिन के इंतज़ार में

जिंदगी जीती रही

, जिस दिन जिंदगी जीने

के काबिल जिंदगी हो जाये
और वक़्त ,

वक़्त-बेवक्त

उस वक़्त का हर वक़्त

इंतज़ार करता रहा

के वक़्त वो आये

जब सुकून से

सारा वक़्त कट जाये

3 Comments

  1. U.M.Sahai says:

    क्या खूब बात कही है, विनय , बधाई. वैसे जब ज़िंदगी जीने लायक हो जाती है तो भी आदमी को सुकून नहीं मिलता है और वो हर वक़्त और अच्छे-और अच्छे वक़्त की तलाश में अपना वक़्त बर्बाद करता रहता है.

  2. siddha Nath Singh says:

    वक़्त और ज़िन्दगी का अनावश्यक दुहराव है,
    पर यही दुहराव से करने से कहीं कहीं अर्थ का अभाव है

    • vinay says:

      @siddha Nath Singh, सीधे शब्दों में मेरी कविता का अर्थ है की हम वक़्त का इंतज़ार करते हैं और वक़्त हमारे कुछ करने का

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