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“अपराध”

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Hindi Poetry

“अपराध”
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अनभिज्ञता, आक्रोश, आनंद, ईर्ष्या, उन्माद,
दबाव, दरिद्र, द्वेष, नारी, भूख, भोग, मतलब,
मद, मनमानी, लैंगिकता, लालच, विचारहीनता,
वृत्ति, विलम्ब, विलासिता, विवशता !
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वर्णमालानुक्रम से उपरोक्त संज्ञाएँ रचती है अपराधी विकार,
जिसके होते हैं जीवन में अनेकानेक ज्ञात-अज्ञात प्रकार !
यद्यपि हानिकारक होते ही हैं सारे के सारे अपराध,
किन्तु आज जो जो अत्यंत भयावह है वह है आतंकवाद,
असंख्य है विश्व की जनसंख्या जिसकी है गिनती अरबों में,
जिसके बीच इने-गिने आतंकवादी छुपे हुए हैं दरबों में !
शक्तिशाली विशाल है दल-बल जो भरा हुआ है फौजों में,

साथ में हैं सुरक्षा-दल, खुफिया तंत्र जो पल रहा मौजों में !
मूल कारण इसका है सरकारी लचीलापन और शिथिलता,
जिसके ही फलस्वरूप और उलझती जा रही है जटिलता !
सारे शक्तिशाली दल सदा ही रहते प्रतीक्षारत आदेश के,
यद्यपि वे परखच्चे उड़ा सकते है पूरे ऐसे परिवेश के !
पता नहीं सरकारी ओहदा क्यों है बना हुआ अन्धा-बहरा,
क्या आतंकियों का किसी से है जुड़ा हुआ नाता गहरा ?

पिटते जाते, सोचते रहते, करते नहीं कुछ केवल बोलते रहते,
आतंकी और नक्सली अचानक कुछ अनहोनी करते रहते,
निर्दोषी जनता के लोग सदा आतंकित हुए अब डरते रहते,
बेमौत ही सैकड़ों नर-नारी और बच्चे आये दिन मरते रहते !
हाल ही गत गुरुवार को ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस रेल दुर्घटना हुई,
जिसके लिए माओवादी संगठन की ओर जाती है शक की सुई !

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4 Comments

  1. Sangeeta Mundhra says:

    An excellent Hindi version of your previous poem, Sir. This version brings out the point even more effectively. Just out of curiosity, which one did you pen first, Sir?

  2. Sanjay singh negi says:

    wah sir
    kya baat hai
    bahut hi badiya
    maine bhi us hadse ke baare me kuch line likhi hai
    bs update nahi ki hai
    badayi ho aapko
    sundar rachna ke liye

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