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मंच पे कब्ज़ा मत कर यार

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Hindi Poetry

कुछ कवियों ने इस मंच पर कब्ज़ा कर लिया है
जिसे देखो रोजाना तीन  चार  कवितायेँ भेज रहा है
मानो, कविता भेजने का ठेका ले लिया है
कविता के नाम पर कैसे काव्य की रचना कर रहे हैं
ना भाषा है,ना शैली है,मीटर का ख्याल नहीं, फिर भी संरचना कर रहे हैं.
जगह घेर कर बैठे हैं,दूसरों की इन्हें परवाह नहीं
शून्य पर आऊट  हो जाते हैं क्यूंकि इनकी कविता का कोई खैर-ख्वाह नहीं
इनकी कविताओं पर ना कोई टिपण्णी करता और ना कोई टीका
काव्य भी बिना स्वाद का  होता है  ,रसहीन और फीका
फिर भी लिखे जाना इनकी आदत में शुमार है
लिख भेजने को  दिल, इनका रहता बेक़रार हैं
ना कभी ये  हाईएस्ट रेटेड में जगह पाते हैं ,ना हाईएस्ट  विजिटेड में जगह
फिर भी लिख भेजना नहीं छोड़ते ,समझ नहीं आता क्या है वज़ह
ज्यादा लिख भेजने से कभी स्टार नहीं मिलते
मुरझाये पौधे कितना भी जल डालिए ,ना कभी खिलते
कम लिखो ,अच्छी लिखो, भा जाये सब को वो लिखो
छा जाओ सारे मंच में ,कवि बनके तुम ऐसा दिखो
नहलायेंगे  तब स्टार से ,
पाठकों के प्यार से ,
टिपण्णी भरमार से
लिखोगे ज्यादा , कविताओं की संख्या तो बढ़ जाएगी
मगर इन लचर कविताओं से तुम्हारी कीमत घट जाएगी
अगर होना है आपको सम्मान का हकदार
तो कम लिख ,विषय अच्छा चुन फिर कर बुराइयों पे  वार
शब्दों का चयन और संपादन हर कविता पे निखार लायेगा
इसी के बलबूते पे तेरा परचम लहराएगा
तब  सभी स्टार लेकर आयेंगे
तुमपे उन्हें  लुटाएंगे
सम्मान  ये दिलाएंगे
———–सी के गोस्वामी (जयपुर)

19 Comments

  1. rajdeep says:

    katasha
    maja aah gaya sir jee

    • c.k.goswami says:

      @rajdeep,
      “आपको मज़ा आ गया ,
      सुन कर ख़ुशी हुयी क्योंकि जैसा मैं अनुभव कर रहा हूँ वैसा ही अनुभव आप जैसे अन्य बुद्धिजीवी भी कर रहे हैं.धन्यवाद.

  2. U.M.Sahai says:

    उत्तम कटाक्ष भरी कविता, गोस्वामी जी, बहुत बधाई.

    • c.k.goswami says:

      @U.M.Sahai,
      ” अजी ये कटाक्ष आपको भा गया
      सच बताऊँ ये सुन कर मुझे भी मज़ा आ गया.”

  3. siddha Nath Singh says:

    achchhi advice , aap ka khari khari kahne ka andaz marak aur nirala hai.

    • c.k.goswami says:

      @siddha Nath Singh, singh sahab jo waqayee me kavi hain ya shayar hain unki shayri athwa kavita padh kar hi pata chal jata hai ki lekhni me dam hai.kintu jinhe bhasha ka bhi gyan na ho aise kavi agar manch par kabja kar lenge to kya hoga?
      is vishay par form me bhi charcha karne ke liye RACHNAJI ne mudda uchhala hai,aap bhi ray vyakt keejiye.

  4. basant tailang bhopal says:

    आपको मैं एक ऐसा कवि कह सकता हूँ जो साफगोई में यकीन करता है और अपनी बात तुरंत लिख भेजता है .ऐसे कवि को ‘स्थलीयकवि’ कहते हैं जो ओन द स्पोट कविता लिख डालता है ,ऐसे लोग बहुत कम होते हैं आपकी यही विशेषता मुझे अच्छी लगती है.
    हो सकता है कुछ लोगों को आपकी ये कविता खटक रही हो किन्तु आपने सच्चाई बयां करके इस मंच पर उपकार ही किया है .मात्र कुछ भी लिख भेजना कविता नहीं होती .जिस प्रकार ५ स्टार होटल की ५ विशेषता होती हैं उसी प्रकार ५ स्टार कविता की भी ५ विशेषता होती हैं. १.कविता का शीर्षक चयन २.शब्द एवं अलंकार प्रयोग ३.मीटर का तारतम्य ४.कविता का उद्देश्य/विषय चयन ५.पाठकों की पसंदगी इन पाँचों मापदंडों में जो खरी उतरती है वही कविता ५ स्टार योग्य होती है किन्तु आज ये हालत हो गयी है की कोई कुछ भी लिख भेजता है और उम्मीद करता है की उसकी कविता मोस्ट विजिटेड या मोस्ट रेटेड कविता बन जाये . आप हर तरह की कवितायेँ लिखते है ,इस khoobee के लिए badhayee .yah कविता भी आपकी vividhta की parichayak है .

    • c.k.goswami says:

      @basant tailang bhopal, vividh vishayon par likhna hi mujhe uchit lagta hai kyonki typed hokar rah jana
      kisi bhi kavi ke liye sahi nahi hai. 5 star ki p[ribhasha me yadi aap BHASHA GYAAN ko bhi sammilit kar lete to paribhasha ko ek sundar roop mil jata.
      star ka mahatv apni jagah hai aur kavita ko pathkon ki pasand banaye rakhna apni jagah hai ,main doosri baat par jor deta hun.pathak ko koi cheej pasand aa jaye samjho,likhna safal huwa.

  5. ashwini kumar goswami says:

    To uphold your advice, I have already posted my English poem
    “Incantation” which emphasizes upon using very choosy language
    in poetry as well as prose etc. Without incantation, nothing can be
    enticing to beckon people for enjoyment and entertainment. You
    cherish this virtue always while posing poems/comments. Thanks !

    • c.k.goswami says:

      @ashwini kumar goswami, आपका प४पोएत्र्य को दिया गया योगदान ,अपने आप में महत्वपूर्ण है.समय समय पर दी गयी कविता सम्बन्धी जानकारियां और मार्गदर्शन सर्वविदित है. आपकी सकारात्मक टिपण्णी के लिए धन्यवाद्.

  6. Raj says:

    Chandrakant ji, I like the way you put these words here. Probably a little advice/ suggestion to such writers might be helpful for them to imrove and learn as it could be beginning for someone and need polishing.

    • c.k.goswami says:

      @Raj, राज जी ,आपको मेरा अंदाज पसंद आया इसके लिए धन्यवाद. आप सब कुछ जानते हुवे भी मंद मंद मुस्कान के साथ मूकदर्शक बने हालात पर नज़र रखे रहते हैं और मैं मुहफट होने के कारण तुरंत अपनी भावनाएं व्यक्त करने से नहीं चूकता.आप सभी कविवर भी यही विचार रखते हैं जो मैं रखता हूँ किन्तु आप इसे अभिव्यक्त करने में संकोच कर जाते हैं जबकि मैं इन्हें लिख भेजता हूँ.”क्रावुन को आज़ाद करो ” के द्वारा भी मैंने सभी कवियों की भावना व्यक्त की थी.आज तक उस विषय पर भी कोई निर्णय नहीं हो सका.
      रचनाजी ने ये मुद्दा तो फोरम में उठाया किन्तु इस कविता पर अब तक उनकी कोई टिपण्णी क्यूँ नहीं आयी समझ में नहीं आ रहा,जबकि ये मुद्दा उन्ही की देन है. आपकी राय एवं विचारों के लिए धन्यवाद.

    • prachi sandeep singla says:

      @Raj, agreed

  7. sushil sarna says:

    आपकी ये साफगोई काबिले तारीफ़ है,मैं आपके विचारों से पूरी तरह से सहमत हूँ, कुछ रचनाएँ आज पानी के उन बुल बलों के समान हैं जो खुद को सागर समझने के बोझ से अभिशिप्त हैं-ये समझते हुए भी कि उनमे स्थाईयत्व नहीं है, वो इस अभिशाप से मुक्त नहीं हो पा रहे हैं-प्रयास करना इस राह का अवश्य पहला कदम है लेकिन लक्ष्यहीन प्रयास से मंजिलों की दूरियां और भी बढ़ जायेंगी -आपकी इस रचना के लिये मैं आपको हार्दिक बधाई और नवांकुरों सीख लेने का सुझाव देना चाहूंगा सर जी – धन्यवाद

    • c.k.goswami says:

      @sushil sarna, इस अभियान में आप भी शामिल हैं यह जान कर ख़ुशी हुयी .आपके व्यक्त विचारों पर शुक्रिया.

  8. Vishvnand says:

    इस मंच के मेम्बरों के लिए बहुत अच्छे वैचारिक सुझाव लिए यह आपकी रचना है. हर author गर इसमें सुझाई बातों का ध्यान रखें जो उनसे expected है तो बहुत अच्छा.
    रचना के लिए अभिनन्दन.
    इसी विषय पर मेरे विचार कुछ ये हैं :-
    “कुछ कवियों ने इस मंच पर कब्ज़ा कर लिया है
    जिसे देखो रोजाना तीन चार कवितायेँ भेज रहा है” ये आपका कथन उतना सही नहीं है. शायद आप हाल में एक नए मेम्बर द्वारा एकदम पोस्ट की गयी कई रचनाओं से है. उन्हें बता दिया गया है की ऐसा न करें तथा कविता की त्रुटियाँ भी सुधारें.

    बाकी इस विषय में पहले भी फोरम पर और कमेन्ट द्वारा काफी चर्चा हो चुकी है और सब मेम्बरों से निवेदन किया है और वो जानते हैं की दिन में अपनी at most 3 ही कवितायें पोस्ट करें, 2 या 1 ही पोस्ट करें तो ज्यादा बेहतर. इससे उनकी कविताओं को औरों की कविताओं के साथ पढ़कर न्याय करने का वाचकों को सही अवसर मिलता है और उनकी रचनाओं का आदर भी बना रहता है . इस बारे में impatience , passion के लिए counter productive रहता है. एक बार अपनी एक या दो ही कवितायें पोस्ट कर और ज्यादा दूसरों की कविता पढ़ कमेन्ट करने और इस तरह p4poetry पर बने रहना मेरे ख्याल से ज्यादा आनंद देता है और सब मेम्बरों को न्याय मिलता रहता है.
    रही बात कविता के स्तर की, वो तो रचनाकार के knowledge और talent की बात है पर वो भी अगर writer अपनी रचनाओं को मिली rating पर और वाचको के कमेन्ट/सुझाव पर ध्यान दे और यहाँ पर पोस्ट की हुई अच्छी रचनाएँ ध्यान से पढ़ें तो अपनी रचनाओं और ability/ talent का स्तर gradually बहुत improve कर सकता है
    अपनी इस site का main objective जिन मेम्बरों में passion for poetry है उनके लिए platform देना है जहां वो अपनी रचनाएँ पोस्ट कर मेम्बरों के साथ share करें, अन्य authors की कवितायें भी पढ़ें, उनपर अपने कमेन्ट दें, अपनी कविताओं पर किये कमेन्ट पर ध्यान दें और खुद के passion for poetry को enjoy कर वृद्धिगत करें. इस द्रष्टि से ही site का सही उपयोग करना है

    हर मेम्बर गर सोचे कि मेरा p4poetry पर मेम्बर बनने का और अपनी कवितायें पोस्ट करने का motive क्या है, जो सही होना चाहिए, तो सारी बातें अपने आप ठीक जगह पर और उचित रहती हैं.

    • c.k.goswami says:

      @Vishvnand, मुझे बहुत ख़ुशी हुयी आप द्वारा मेरी कविता के आलोक में व्याख्या करने पर. आप जैसे लोगों के मार्गदर्शन से ही लोगों को कुछ समझ में आ पायेगा .आपकी इस सकारात्मक प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद्.
      इस विषय में रचनाजी ने भी फोरम में मुद्दा उठाया है किन्तु वो पौध लगाकर उसे भूल गयी हैं उन्हें आगे भी इस पौधे की सिंचाई जारी रखना है.

    • prachi sandeep singla says:

      @Vishvnand, बहुत अच्छा कहा है आपने विश्वानन्द जी :)पूरी तरह सहमत

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