« »

ये कैसा बुलावा

2 votes, average: 4.00 out of 52 votes, average: 4.00 out of 52 votes, average: 4.00 out of 52 votes, average: 4.00 out of 52 votes, average: 4.00 out of 5
Loading...
Hindi Poetry

ये कैसा बुलावा
(
कई बार ऐसे निमंत्रण आते हैं कि समझ में नहीं आता कि वो औपचारिकता निभा रहे हैं या वास्तव में बुला रहे हैं.उनकी बातों में सत्यता होती है किन्तु उनको या तो लगता है फ़ोन में बात करना नहीं आता या वो बहुत ही चालाक हैं .ऐसा ही फ़ोन मेरी इक दूरकी सलहज  का आया , जो कविता के रूप में आपके सामने है अब  आप ही बताइए इसे क्या समझूँ.)

रात के पाने बारह बजे दो बार मिस काल आया
बंद हो गया फ़ोन इससे पहले कि मैंने उठाया
पता चला  किसी से  साले के परिवार में इक लड़की मिक्स हो गयी
तुरत फुरत में शादी की डेट भी  फिक्स  हो गयी
दूसरे दिन
सलहज का फोन आया
शादी पे भोपाल बुलाया
निमंत्रण कुछ इस प्रकार था
उनको हमारा इंतज़ार था
“लल्ला  की शादी पक्की हो गयी है -आपको जरुर जरुर आना है
ट्रेन में रिजर्वेशन तो मुश्किल  है  ,फिर भी करवाना है
इतनी तेज गर्मी है कैसे आ पाओगे
बिन रिजर्वेशन तो गर्मी में मर जाओगे
जोधपुर-भोपाल गाड़ी में तो तकलीफे ही तकलीफें होती हैं
रोजाना देरी से पहुँचती है और पब्लिक रोती है
चेन्नई-जयपुर सुपर फास्ट में तो आरक्षण का सवाल ही नहीं उठता
दलालों के चक्कर में पड़नेवाला लुटता और परेशानी में पड़ता
देखलो तकलीफें बहुत हैं फिर भी आपको आना है -रिश्ता फूफा का निभाना है
लिफ्ट भी नहीं है और  हमारा  फ्लेट  भी  है पांचवे माले पर
पानी भी दो दिन में एक बार आता है ,जल  भार  है तुम्हारे साले पर
कई दिन हो जाते हैं ,नहाने का अवसर नहीं मिलता
पीने का शुद्ध पानी भी अक्सर नहीं मिलता
शहर में बीमारियों का बुरा हाल है
इनसे पीड़ित सारा भोपाल है
आप तो हार्ट के मरीज हैं पांचवी  मंजिल  कैसे चढ़ पाओगे
कितनी बार चढ़ चढ़  के दवा खाओगे
फिर भी आपको आना है -हमारे बहनोई हो बारात की शान बढ़ाना है
अगर आ रहे हो तो हमें पहले से सूचित करना
क्यूंकि धर्मशाला ढूंढ़नी  पड़ेगी ,हमें बंदोबस्त करना
गलत सूचना ना देना ,अगर ना आ सको तो कह देना
दिखावे  में आ कर अपने वृद्ध तन को   ना कष्ट   देना
आने ना आने से रिश्तों में कोई फरक नहीं पड़ता
ऐसे आने में क्या मिलेगा जिससे शरीर बिगड़ता
हम आपकी उपस्थिति मान लेंगे ,जो भी गिफ्ट भेजोगे ससम्मान लेंगे
मगर आपको फिर भी आना है- चूँकि रिश्तेदारों को भी तो हमें  दिखाना है
निमंत्रण पत्र डाक से भेज दिया है मिल जायेगा
सारे कार्यक्रम उसी में लिखे हैं ,पता चल जायेगा
ये ना कहना कि हमने आपको व्यक्तिगत नहीं कहा
आपकी खातिर इतना टेलेफोन बिल भी सहा
साले सलहज हैं बहनोई को सम्मान  जो देना है
अब ये आप पर निर्भर है भतीजे को  आशीर्वाद में क्या देना  है
जो भी भेजोगे हम सहर्ष  करेंगे स्वीकार
बड़े बूढों से मिले जो भी, करें कैसे इनकार
अगर गिफ्ट , समझ ना  आये  तो भिजवादो नगदी
पर जो भी भिजवाना हो,भिजवाओ जल्दी
अब रखती हूँ फोन क्यूंकि औरों को भी करना है
आना जरूर -ट्रेन  की  धक्का-मुक्की और भीड़ से नहीं डरना है
जब ऐसा हो  निमंत्रण  तो कौन जायेगा
भयंकर गर्मी और भीड़  में कौन अपना कीमा बनवायेगा
———सी के गोस्वामी (जयपुर)

6 Comments

  1. ashwini kumar goswami says:

    समझ में नहीं आता आप मुझे क्यों इतना खर्चीला बनाते जा रहे हैं ! आपकी
    चुटकियों से बार बार मेरे सितारों का व्यय होता रहता है !

  2. basant tailang bhopal says:

    दिखावटी रिश्तों का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करनेवाली एक मनोरंजक कविता.ये सच है ऐसे कई रिश्तेदार मिल जायेंगे जो सामाजिक बंधनों के कारण न चाहते हुवे भी झूठा प्रेम प्रदर्शित करने को विवश होते हैं.उनकी बातचीत से ही पता चल जाता है कि उनके मन में क्या है और वो क्या दिखाने का झूठा प्रयास कर रहे हैं.कवी इस हास्य को बखूबी बयां करने में सफल रहा है. बधाई..

    • c.k.goswami says:

      @basant tailang bhopal, बसंतजी आपको हमारी रचनाएँ अच्छी लग रही हैं ,हमें ख़ुशी हुवी कविता का जुड़ाव आम जीवन से करने के लिए प्रयासरत रहता हूँ .इसमें आप लोगों की प्रतिक्रिया पाकर खुश होता हूँ.

  3. Vishvnand says:

    बहुत बढ़िया मार्मिक व्यंग.
    ये सारा असल में आपको नहीं आपसे मिलनेवाले गिफ्ट को invitation है
    आज के जमाने में मतलब की चीज़ों से ही मतलब रहता है
    आपको ये मतलब समझकर उनको बिन संकोच अपना मतलब समझाना पड़ता है
    तब ही उनके समझ में शायद कुछ मतलब की बात समझ में आती है…

    रचना की लिए बधाई

    • c.k.goswami says:

      @Vishvnand, दैनिक जीवन में जो देखता हूँ ,आप लोगों को लिख भेजता हूँ ताकि इन व्यंग्य भरी रचनाओं से आपका मनोरंजन हो सके.आपकी सटीक प्रतिक्रिया पाकर दिल खुश हो जाता है.

Leave a Reply