« »

अंधे का अनुभव

1 vote, average: 3.00 out of 51 vote, average: 3.00 out of 51 vote, average: 3.00 out of 51 vote, average: 3.00 out of 51 vote, average: 3.00 out of 5
Loading...
Hindi Poetry

अंधे का अनुभव

अँधा  खिड़की से बाहर हाथ  निकाल,जगह बताने में माहिर था
उसके ज्ञान चक्षु खुले थे ,ये सभी सह यात्रियों में जाहिर था
आँखों से दिखलाई नहीं देता था मगर तजुर्बा था
ट्रेन के सभी यात्रियों ने अजमाया कई मर्तबा था
खिड़की से हाथ बाहर निकाल ,
जब उसने शहर का नाम शिमला बताया
तो सही नाम जान कर सबका सर चकराया
मगर उसने ठण्ड महसूस कर ये सब जाना था
बर्फ के कण हाथ में देख कर पहचाना था
खिड़की से हाथ निकाल जब उसने रेत के कण पाए
तो बीकानेर  का नाम सुन उसके मुह से सभी चकराए
अगली परीक्षा कुछ कठिन थी उसकी
मैदानी एरिये में यू पी ,बिहार  से पहचान हो किसकी
तभी उसने बाहर हाथ निकाल कर बताया बिहार आ गया
क्यूंकि यहाँ वो गच्चा खा गया
उसके बाहर निकले हाथ से किसी ने कड़ा उतार लिया
कड़ा खोया किन्तु उसने जगह का पता पा लिया
बिहारी मुर्ख और लापरवाह को सबक सिखाते हैं
लापरवाह आदमी अपने को ऐसे ही लुटवाते है.
अपने सामान की हिफाज़त नहीं करोगे तो रोवोगे
बेवकूफी से हाथ बाहर निकालोगे तो अपना सामान खोवोगे.
आँख से ही नहीं अनुभव और ज्ञान से भी  देखिये
प्रकृति के मारे इस अंधे के अनुभव से भी कुछ सीखिए.
——-सी के गोस्वामी (जयपुर)

10 Comments

  1. siddha Nath Singh says:

    bad अच्छा बदनाम बुरा की कहावत बिहार u p पर लागू होती है, चोरी चाकरी के अब मात्र ये प्रान्त ही नहीं हैं एकाधिकारी मगर !

    • c k goswami says:

      @siddha Nath Singh, sach कहा आपने ‘बद अच्छा बदनाम बुरा’ बिहारी और यूपी के लोगों के बारे में ये पुराणी कहावतें हैं.आजकल तो हर कोई ऐसा मिल जायेगा जो मौके का लाभ उठाता है.

  2. Raj says:

    शुक्र है कि कड़ा ही खोया, वरना आजकल के वक़्त में तो लोग अपनी सोच ही खो देते हैं.

  3. Vishvnand says:

    आज अगर होते तो वो अंधे महाशय क्या करते
    शायद कोई जगह नहीं कौनसा देश है
    बस यही बताने में माहिर होते ……
    वरना सब एक सा और चौपट है…

    • c.k.goswami says:

      @Vishvnand,

      देख नहीं सकता आँखों से ,अनुभव से ही बतलायेगा
      जलवायु,स्पर्श,हादसा , नेत्रहीन के काम आएगा

  4. U.M.Sahai says:

    अच्छी रचना, गोस्वामी जी, पर सूरदास जी स्वयं किस प्रदेश से थे यह पता नहीं चल सका.

    • Harish Chandra Lohumi says:

      @U.M.Sahai, हो सके तो ट्रेन का नंबर और नाम भी …..

      • c.k.goswami says:

        @Harish Chandra Lohumi,

        बिन आंख वाले भी अनुभव से दुनिया को जान लेते है
        स्पर्श और जलवायू देख कर ही सबको पेहचान लेते है
        बिहार का बिहारी समझदार है ,लापरवाह नही
        अंधे की तऱ्ह हाथ लहराये,ऐसा बेपरवाह नही
        बाहर से आये लोग बिहार में ऐसे अपराध करते है
        करता कोई और है ,बिहारी तो बस बदनामी से डरते है

    • c.k.goswami says:

      @U.M.Sahai, .बिहार का आदमी कर्मठ,मेहनती,बुद्धिमान ,परिपक्व और जनता को जागरूक करनेवाला होता है.जयप्रकाश नारायणजी ,डाक्टर राजेन्द्रप्रसाद,जगजीवन रामजी एवं नीतिशकुमार ने यह साबित कर दिया है. यह बिहार पे मेरी जानी मानी चुटकी थी,
      इसे हास्य व्यंग्य का ही एक भागसमझे
      कहने को तो “बनारसी ठग ‘मशहूर होते हैं इसका मतलब यह तो नहीं कि हर बनारसी यूपीवाला ठग होता है.वैसे ही बिहार का हर बिहारी ऐसा नहीं होता जैसा अंधे के साथ कड़े उतारनेवाला होता है.

Leave a Reply